पेट्रोल का नया अवतार
आज पेट्रोल बोला, “भाई इथेनॉल,
यूं आजा कर लें थोड़ा-सा धमाल।”
सोचते इथेनॉल बोला, “ठीक है यार,
अब तो मैं भी हूँ सरकार का प्यार!”
मेरी गाड़ी बोली, “धीरे-धीरे आना,
मुझको प्रयोगशाला नहीं बनाना।”
इंजन बोलता, “पहले सोच-विचार,
फिर ना करना ऐसा कोई सुधार।”
मालिक बोला, “जेब तो बच जाए,
माइलेज भी थोड़ा-सा बढ़ जाए।”
मेकेनिक हँसते हुए धीरे से बोला,
“मेरा धंधा कौन सँभालेगा भला?”
नेता बोले, “सब कुछ होगा बढ़िया,
जनता बोली, “पहले जोड़े कड़िया!”
विशेषज्ञ बोले, “करो यहाँ परीक्षण,
फिर दे देना जनता को आश्वासन।”
अंत में इसका निकला यही निचोड़,
जल्दबाज़ी में से मिलता है झंझोड़।
हाँ, पहले सोचो, फिर कदम बढ़ाओ,
जनहित वाला ही रास्ता अपनाओ।
हँसते-हँसते आम लोगों ने ये माना,
सोच-समझकर “काम” है करवाना।
वरना जनता यही कहेगी बार-बार—
“पेट्रोल में क्या! मिलाया हैं सरकार!”
— संजय एम तराणेकर
