कहानी

मोहब्बत रूठ जाए, तो ज़िंदगी के सारे रंग उड़ जाते हैं 

यह कहानी किसी एक शख़्स की नहीं, बल्कि हर उस दिल की है जिसने मोहब्बत में सिर्फ़ पाना नहीं, बल्कि ख़ुद को खोना सीखा है। यह दास्तान है एहसास-ए-तनहाई, हिज्र की कसक, और उन अधूरे ख़्वाबों की जो आंखों में ही दम तोड़ गए। ज़िंदगी कभी-कभी इंसान को एक ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर देती है जहां से आगे का हर रास्ता धुंधला और पीछे का हर मंज़र मिट्टी का ढेर नज़र आता है और मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। कहते हैं कि मोहब्बत ज़िंदगी को रंगीन बना देती है, लेकिन कोई यह क्यों नहीं बताता कि जब वही मोहब्बत रूठ जाए, तो ज़िंदगी के सारे रंग उड़ जाते हैं और सिर्फ एक ही रंग बचता है,

तनहाई का स्याह रंग। जिस दिन वह मुझे छोड़कर गई, आसमान पर बादल तो नहीं थे, मगर मेरी आंखों में बरसात रुकने का नाम नहीं ले रही थी और हिज़्र का दर्द क्या होता है, यह मुझे उस रात मालूम हुआ जब घर की हर दीवार मुझ पर हंस रही थी और कमरे का हर कोना उसकी मौजूदगी का पता पूछ रहा था। जुदाई तो सिर्फ़ एक लफ्ज़ था मेरे लिए, मगर जब गुज़री तो मालूम हुआ कि यह तो एक ज़िंदा दरगोर होने का नाम है। हमने मिलकर कितने ख़्वाब बुने थे, एक छोटा सा घर, शाम की चाय, और ढेर सारी बातें… मगर वह सारे ख़्वाब अब मेरी आंखों में कांच के टुकड़ों की तरह चुभते हैं और जब भी आंखें बंद करता हूं, वही अधूरे ख्वाब सामने आ खड़े होते हैं और पूछते हैं कि हमारा क्या क़सूर था? अब हालत यह है कि सुबह होती है तो जागने की कोई वजह नहीं होती, शाम ढलती है तो दिल का दर्द और गहरा हो जाता है और रात को जब दुनिया सो जाती है, तो मेरे अधूरे ख़्वाब जाग उठते हैं। लोग कहते हैं वक्त के साथ हर ज़ख्म भर जाता है, लेकिन मेरा ज़ख्म तो वक्त के साथ और हरा होता जा रहा था और मेरे दिल और दिमाग़ पर अब उसकी यादों का मुस्तक़िल बसेरा था। वह उसका हल्के से मुस्कुराना, वह ग़ुस्से में मुंह फेर लेना, और वह जाते-जाते आख़िरी बार मुड़कर देखना… यह सब यादें अब मेरे वज़ूद का हिस्सा बन चुकी हैं और मैं चाहूं भी तो इनसे फ़रार मुमकिन नहीं क्योंकि यह यादें कोई मेहमान नहीं जो आएं और चली जाएं, यह तो अब इस वीरान दिल की मालकिन बन बैठी हैं। आज भी जब बाहर तेज़ हवा चलती है या बारिश की बूंदें खिड़की पर दस्तक देती हैं, तो दिल धड़क उठता है कि शायद वह लौट आई हो, मगर फ़िर तनहाई का अहसास मुझे झंझोड़ कर कहता है कि वह जा चुकी है, और अब सिर्फ़ तुम हो, तुम्हारा हिज़्र है, और यह कभी न ख़त्म होने वाला दर्द है, इसलिए ज़िंदगी चल रही है, सांसें आ जा रही हैं, मगर हक़ीक़त यही है कि मैं जी नहीं रहा, बस वक़्त काट रहा हूं। सालों-साल गुज़र गए, यादों का वह ग़ुबार अब मेरे चेहरे की झुर्रियों और बालों की सफेदी में झलकने लगा था और दिल ने मान लिया था कि तनहाई ही मेरा मुक़द्दर है। मैं पैंतालीस (45) साल का हो चुका था, ज़िंदगी की धूप-छांव ने मेरे चेहरे पर वक्त की लकीरें खींच दी थीं, और मैं खुद को अंदर से बिल्कुल थका हुआ और बूढ़ा महसूस करता था, लेकिन ज़िंदगी का सबसे बड़ा सस्पेंस अभी बाकी था। एक शाम, जब आसमान पर शफ़क़ के सुर्ख़ और सुनहरे रंग बिखरे हुए थे, मेरे घर के पुराने और जंग लगे दरवाज़े पर किसी ने दस्तक दी, एक ऐसी दस्तक, जिसकी थाप मेरे दिल की धड़कन से बिल्कुल वाक़िफ़ थी। मैंने भारी क़दमों से जाकर दरवाज़ा खोला… और मेरी आंखें पथरा गईं। सामने वह खड़ी थी, लेकिन वह अकेली नहीं थी, उसके साथ बीस-बाईस साल का एक नौजवान लड़का खड़ा था, जिसकी आंखें, जिसका चेहरा, और जिसके बोलने का अंदाज़ बिल्कुल… मुझ जैसा था। मेरा सर चकराने लगा और इससे पहले कि मैं कुछ समझ पाता, वह आगे बढ़ी और उसकी आंखों से आंसुओं का सैलाब रवां था, लेकिन इन आंसुओं में अब हिज्र का दर्द नहीं, बल्कि विसाल का सुकून था। उसने लरज़ती हुई आवाज़ में कहा कि मुझे माफ़ कर देना… जिस दिन मैं तुम्हें छोड़कर गई थी, मैं मजबूर थी, मेरे ख़ानदान ने मुझे क़ैद कर लिया था और मेरी मर्ज़ी के बिना मुझे मुल्क से दूर भेज दिया गया था, लेकिन मैं तुम्हारी मोहब्बत की एक निशानी अपने साथ ले गई थी और मैंने अकेले इस बच्चे को पाला, सिर्फ तुम्हारी याद के सहारे और आज जब यह अपने पैरों पर खड़ा हो गया, तो उसने मुझसे कहा कि अम्मी, अब चलो और अपने अधूरे ख्वाब को पूरा करो। जैसे ही मेरे बेटे ने आगे बढ़कर मेरे कांपते हुए हाथ थामे और धीमे से कहा कि अबू… हम घर वापस आ गए हैं,तो मेरे अंदर एक ऐसा जादुई जोश और वलवला भरा कि मुझे लगा मेरी गुज़री हुई जवानी मेरे बेटे की शक़्ल में मुझसे आकर लिपट गई हो। मैंने अपने सामने अपनी ही नौजवानी का अक्स देखा,वही हिम्मत, वही मासूमियत और वही मज़बूती और उसे देखकर मेरे वज़ूद का मुरझाया हुआ दरख़्त एक बार फिर हरा हो गया और अब मेरा पूरा जीवन संवरता हुआ महसूस हो रहा था। मेरी आंखें चमक उठीं, बिल्कुल उसी तरह जैसे बाईस साल पहले इस सच्चे इश्क़ की शुरुआत में चमका करती थीं। मैंने नज़र उठाकर अपनी शरीक़-ए-हयात को देखा, वक़्त ने अगरचे हम दोनों से बहुत कुछ छीना था, लेकिन जब मेरी नज़रें उसके चेहरे पर पड़ीं, तो उसका वही पुराना हिजाब और शर्म-ओ-हया देखकर मेरा दिल एक बार फिर उसी तरह धड़का जैसे पहली मुलाक़ात में धड़का था। बरसों के इस लंबे इंतज़ार के बाद भी उसकी आंखों में मेरे लिए वही मान, वही मोहब्बत और वही हया आज भी क़ायम थी और उसका वह झुका हुआ सर और चेहरे पर फैली सुर्खी गवाही दे रही थी कि हिज्र की तपिश ने हमारी मोहब्बत को जलाया नहीं, बल्कि और कुंदन बना दिया है। मेरा कल जो वीरान था, वह अब बेटे की सूरत में मेरे सामने खड़ा मुस्कुरा रहा था और मेरा आज जो उदास था, वह शरीक़-ए-हयात के इस वालहाना इस्तक़बाल और हया से रोशन हो चुका था। वह लम्हा मेरी ज़िंदगी के तमाम दर्द, तमाम रातों के जागने और तनहाई के इस लंबे अज़ाब का मदावा बन गया और वह सूना आंगन, जो सालों से वीरान था, अचानक क़हक़हों, आंसुओं और गले मिलने की गर्मजोशी से गूंज उठा। जो अधूरे ख्वाब थे, वे अब तकिए के नीचे दबे मुरझाए हुए पत्ते नहीं रहे, बल्कि हक़ीक़त बनकर मेरे सामने मुस्कुरा रहे थे और जो हिज़्र की रातें थीं, वे अब विसाल की ख़ूबसूरत और रोशन सुबहों में बदल चुकी थीं और यादों का बसेरा जो था, अब पुरानी दर्दनाक यादें रुख़सत हो चुकी थीं, और उनकी जगह नई उम्मीदें घर कर चुकी थीं। ज़िंदगी ने मुझसे मेरी जवानी का एक बड़ा हिस्सा ज़रूर छीना था, मगर पैंतालीस साल की उम्र में मुझे वह सब कुछ लौटा दिया जिसकी मैंने कभी तमन्ना की थी।

मुझे एक नई और लाज़वाल जवानी मिल चुकी थी। अब शाम की चाय अकेले नहीं होती थी, अब रात की तनहाई मुझ पर हंसती नहीं थी और अब मेरे पास मेरी मोहब्बत भी थी, और हमारी मोहब्बत का वह ख़ूबसूरत समर भी था। जहां तक नज़र जाती, बस खुशियां ही खुशियां थीं, जैसे ख़ुदा ने मेरी बरसों की ख़ामोश दुआओं को सुनकर ज़मीन पर ही जन्नत उतार दी हो।

— डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह सहज़ 

डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह

पिता का नाम: अशफ़ाक़ अहमद शाह जन्मतिथि: 24 जून जन्मस्थान: ग्राम बलड़ी, तहसील हरसूद, जिला खंडवा, मध्य प्रदेश कर्मभूमि: हरदा, मध्य प्रदेश स्थायी पता: मगरधा, जिला हरदा, पिन 461335 संपर्क: मोबाइल: 9993901625 ईमेल: dr.m.a.shaholo2@gmail.com शैक्षिक योग्यता एवं व्यवसाय शिक्षा,B.N.Y.S.बैचलर ऑफ़ नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंस. बी.कॉम, एम.कॉम बी.एड. फार्मासिस्ट आयुर्वेद रत्न, सी.सी.एच. व्यवसाय: फार्मासिस्ट, भाषाई दक्षता एवं रुचियाँ भाषाएँ, हिंदी, उर्दू, अंग्रेज़ी रुचियाँ, गीत, ग़ज़ल एवं सामयिक लेखन अध्ययन एवं ज्ञानार्जन साहित्यिक परिवेश में रहना वालिद (पिता) से प्रेरित होकर ग़ज़ल लेखन पूर्व पद एवं सामाजिक योगदान, पूर्व प्राचार्य, ज्ञानदीप हाई स्कूल, मगरधा पूर्व प्रधान पाठक, उर्दू माध्यमिक शाला, बलड़ी ग्रामीण विकास विस्तार अधिकारी, बलड़ी कम्युनिटी हेल्थ वर्कर, मगरधा साहित्यिक यात्रा लेखन का अनुभव: 30 वर्षों से निरंतर लेखन प्रकाशित रचनाएँ: 2000+ कविताएँ, ग़ज़लें, सामयिक लेख प्रकाशन, निरन्तर, द ग्राम टू डे, दी वूमंस एक्सप्रेस, एजुकेशनल समाचार पत्र (पटना), संस्कार धनी (जबलपुर),जबलपुर दर्पण, सुबह प्रकाश , दैनिक दोपहर,संस्कार न्यूज,नई रोशनी समाचार पत्र,परिवहन विशेष,समाचार पत्र, घटती घटना समाचार पत्र,कोल फील्ड मिरर (पश्चिम बंगाल), अनोख तीर (हरदा), दक्सिन समाचार पत्र, नगसर संवाद, नगर कथा साप्ताहिक (इटारसी) दैनिक भास्कर, नवदुनिया, चौथा संसार, दैनिक जागरण, मंथन (बुरहानपुर), कोरकू देशम (टिमरनी) में स्थायी कॉलम अन्य कई पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर रचनाएँ प्रकाशित प्रकाशित पुस्तकें एवं साझा संग्रह साझा संग्रह (प्रमुख), मधुमालती, कोविड, काव्य ज्योति, जहाँ न पहुँचे रवि, दोहा ज्योति, गुलसितां, 21वीं सदी के 11 कवि, काव्य दर्पण, जहाँ न पहुँचे कवि (रवीना प्रकाशन) उर्विल, स्वर्णाभ, अमल तास, गुलमोहर, मेरी क़लम से, मेरी अनुभूति, मेरी अभिव्यक्ति, बेटियां, कोहिनूर, कविता बोलती है, हिंदी हैं हम, क़लम का कमाल, शब्द मेरे, तिरंगा ऊंचा रहे हमारा (मधुशाला प्रकाशन) अल्फ़ाज़ शब्दों का पिटारा, तहरीरें कुछ सुलझी कुछ न अनसुलझी (जील इन फिक्स पब्लिकेशन) व्यक्तिगत ग़ज़ल संग्रह: तुम भुलाये क्यों नहीं जाते तेरी नाराज़गी और मेरी ग़ज़लें तेरा इंतज़ार आज भी है (नवीनतम) पाँच नए ग़ज़ल संग्रह प्रकाशनाधीन सम्मान एवं पुरस्कार साहित्यिक योगदान के लिए अनेक सम्मान एवं पुरस्कार प्राप्त पाठकों का स्नेह, साहित्यिक मंचों से मान्यता मुश्ताक़ अहमद शाह जी का साहित्यिक और सामाजिक योगदान न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि पूरे हिंदी-उर्दू साहित्य जगत के लिए गर्व का विषय है। आपकी लेखनी ने समाज को संवेदनशीलता, प्रेम और मानवीय मूल्यों से जोड़ा है। आपके द्वारा रचित ग़ज़लें और कविताएँ आज भी पाठकों के मन को छूती हैं और साहित्य को नई दिशा देती हैं।

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