कविता

फूल

फूल ने मुस्कुराते हुए कहा,
मैं काँटों के साथ रहता हूँ,
मेरा जीवन बहुत कठिन है,
फिर भी खुशबू बिखेरता हूँ।
तब मैंने हँसकर कहा,
तुम्हारी तरह मेरा भी जीवन है,
अभी मैं एक छोटा-सा बच्चा हूँ,
धीरे-धीरे बड़ा हो जाऊँगा।
अपनी खुशबू से सारा जहाँ महकाऊँगा,
सबके जीवन में प्रेम जगाऊँगा,
फिर जीवन के आखिरी दिनों में,
भगवान के चरणों में रहूँगा।
और अंत में एक दिन,
तुम्हारी ही तरह मिट्टी में मिल जाऊँगा,
पर अपनी खुशबू से लोगों के दिलों में,
सदा के लिए बस जाऊँगा।

— गरिमा लखनवी

गरिमा लखनवी

दयानंद कन्या इंटर कालेज महानगर लखनऊ में कंप्यूटर शिक्षक शौक कवितायेँ और लेख लिखना मोबाइल नो. 9889989384

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