बेटा, ज़िंदगी आसान भी है और मुश्किल भी
प्रिय अमन,मेरी आँखों के तारे, नूर‑चश्म,बेटा,तुम बचपन में मेरे कंधे पर सिर रखकर ज़िद किया करते थे, कभी नए खिलौने
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Read Moreमहानगर की भागदौड़ भरी जिंदगी में सुबह भी जैसे घड़ी की सुइयों के इशारे पर होती है। यहाँ लोग बस
Read Moreदिन ढलते ही शहर की रौनक बदल जाती थी। एक तरफ़ इत्र की ख़ुशबू और दूसरी तरफ घुंघरूओं की झनकार।
Read Moreशाम का सहर तारी था, और कमरे में रखी पुरानी मेज़ लैंप की धीमी रोशनी में नहाई हुई थी। अनवर,
Read Moreशाम का वक्त था और पार्क के सुनहरी साए लंबे हो रहे थे। हवा में एक अजीब सा उदास सुकून
Read Moreशाम का वक्त था, कमरे में मद्धम रोशनी जल रही थी। मेज़ पर अबू की पुरानी डायरी रखी थी, जिसके
Read Moreवह सुनहरी दोपहर थी जब दफ़्तर में दाख़िल हुआ और काग़ज़ पर नज़र डाली, तो पलट कर देखा कि सामने
Read Moreसन 1930 के दशक की शुरुआत का समय था। चटगांव के आसमान पर अक्सर घने काले बादल छाए रहते थे।
Read Moreगांव का नाम था नरसिंहपुर। गांव के आखिरी छोर पर, टूटे हुए कुएं और बरगद के पेड़ के पास एक
Read Moreआज सुबह से ही दिल बड़ी जोर से धड़क रहा था ना जाने क्यों ? रह रह कर तुम्हारा चेहरा
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