कहानी – गुरु दक्षिणा
गांव के छोर पर बना वह प्राथमिक विद्यालय बरसों से मास्टर केशवराम की पहचान था। पूरे इलाके में लोग उन्हें
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Read Moreअम्मा को, जब से हमने होश संभाला था, बस एक ही बात बार-बार दोहराते देखा था—“अच्छी चीज़ को रोज़ इस्तेमाल
Read Moreहरियाणा के एक छोटे-से कोने में बसा था छतरपुर गाँव। गाँव छोटा था, लेकिन उसके रिश्तों की दुनिया बहुत बड़ी
Read Moreसमय चक्र घूमता रहा। मालती अपने परिवार के सुख-दुःख में ऐसे उलझी रही कि मायके जाकर अपने माता पिता के
Read Moreदिल्ली की वह शाम कुदरत का कोई नायाब करिश्मा थी। आसमान सुर्ख लाल रंग में रंगा था और हवाओं में
Read Moreउस सुबह मैं घूमने नहीं निकला था… मैं तो अपने ही टूटे हुए दिल से दूर भागना चाहता था।हर कदम
Read Moreविधा- कहानीशीर्षक- विरासत की छतरी “ये सांध्य-वेला भी कितनी खूबसूरत होती है न!” सांध्य-वेला का नजारा देखते हुए नदी किनारे
Read Moreविधा- कहानीशीर्षक- अगर मैं आज़ादी के दौर में होती! अगर मैं आज़ादी के दौर में होती तो शायद जीवन कुछ
Read More‘ स्व’ और ‘ सवि’‘सवि’ और ‘ स्व’- दो नाम मेरे लिए परिचित हैं। इनकी कहानी को कितनी ही बार
Read Moreरात के दो बज रहे थे, लेकिन मंजूर साहब की आँखों से नींद कोसों दूर थी। उनके सामने कॉपी का
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