गीतिका/ग़ज़ल

कठिन काम है

हाल दिल का छुपाना कठिन काम है।
दिल से दिल को मिलाना कठिन काम है।।

दर्द की धूप में हँस के जीते रहे।
गीत खुशियों के गाना कठिन काम है।।

झूठ के जाल में लोग उलझे रहे।
सच की राहों में आना कठिन काम है।।

बात दिल की ज़ुबाँ तक न आए कभी।
हक़ मुहब्बत जताना कठिन काम है।।

नफ़रतों के घने दौर में आज भी।
प्यार की लौ जलाना कठिन काम है।

लोग सुनते हैं लेकिन समझते नहीं।
सच बयानी सुनाना कठिन काम है।।

दर्द को जीत कर यार हँसते रहो।
ज़िंदगी का तराना कठिन काम है।।

अश्क़ पीकर जो हँसता रहा है ‘मृदुल’,
हौंसला यह दिखाना कठिन काम है।

— मंजूषा श्रीवास्तव “मृदुल”

*मंजूषा श्रीवास्तव

शिक्षा : एम. ए (हिन्दी) बी .एड पति : श्री लवलेश कुमार श्रीवास्तव साहित्यिक उपलब्धि : उड़ान (साझा संग्रह), संदल सुगंध (साझा काव्य संग्रह ), गज़ल गंगा (साझा संग्रह ) रेवान्त (त्रैमासिक पत्रिका) नवभारत टाइम्स , स्वतंत्र भारत , नवजीवन इत्यादि समाचार पत्रों में रचनाओं प्रकाशित पता : 12/75 इंदिरा नगर , लखनऊ (यू. पी ) पिन कोड - 226016

Leave a Reply