युद्ध की विभीषिका और मानवता का संकट
मानव इतिहास में युद्ध कोई नई घटना नहीं है, किंतु आधुनिक युग में इसकी विभीषिका पहले से कहीं अधिक भयावह
Read Moreमानव इतिहास में युद्ध कोई नई घटना नहीं है, किंतु आधुनिक युग में इसकी विभीषिका पहले से कहीं अधिक भयावह
Read Moreजिसने मन को जीत लिया हो,वो न कभी भयभीत हुआ।राह कठिन हो या अँधियारी,सदा वही जगजीत हुआ ।1चाहे धूप जले
Read Moreजीवन एक रंगमंच है—पर निर्देशक कोई और है,हम तो बसउसके संकेतों पर चलते पात्र हैं।जन्म के साथ हीहाथ में थमा
Read Moreभारतीय संस्कृति में नवरात्र केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि आत्म शुद्धि और अंतर्मन के जागरण का दिव्य अवसर है।
Read Moreसमय के आईने में मनुष्यता का पुनर्पाठनव संवत्सर की देहरी परफिर आ खड़ा है समय—अधरों पर औपचारिक मुस्कान,और नेत्रों में
Read Moreसमय का चक्र निरंतर गतिमान है। हर वर्ष अपने साथ नूतन संभावनाएँ, आशाएँ और अनुभवों का विस्तृत आकाश लेकर आता
Read Moreतरुवर नद पर्वत झरने सब,जीवन का आधार है। संरक्षण इनका करने से,जन जन का उद्धार है। मानवता मानव का गुण
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