छाँव अमराई की
अमराई की छांव सुहानी, मनवा गीत सुनाए है,भीनी-भीनी खुशबू से, यह जीवन महकाए है। कोयल मीठी तान सुनाए, पवन रागिनी
Read Moreअमराई की छांव सुहानी, मनवा गीत सुनाए है,भीनी-भीनी खुशबू से, यह जीवन महकाए है। कोयल मीठी तान सुनाए, पवन रागिनी
Read Moreबरसात की पहली शाम थी। कंक्रीट के ऊँचे जंगलों के बीच पानी सड़कों पर बह रहा था। गाड़ियों का शोर,
Read Moreकभी आईने में खुद को देखा था,तो आँखों में एक सपना चमकता था…नाम मेरा भी था, पहचान मेरी भी,जीवन मेरा
Read Moreमन के भीतर कोई छुपकेधीरे-धीरे गाता है,मौन बने उस संवादों मेंसच अपना मिल जाता है॥ (1)शोर बहुत है इस दुनिया
Read Moreघर में सब कुछ था—सुविधाएँ, सुकून और व्यवस्थित दिनचर्या…बस, जो नहीं था, वह था उस व्यक्ति का नाम, जिसके बिना
Read Moreगर्मी अपने चरम पर थी। धूप मानो धरती को तपाकर उसकी सहनशक्ति को परख रही थी। सड़कें सन्नाटे में डूबी
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