गीत – जिसने मन को जीत लिया
जिसने मन को जीत लिया हो,
वो न कभी भयभीत हुआ।
राह कठिन हो या अँधियारी,
सदा वही जगजीत हुआ ।
1
चाहे धूप जले जीवन में,
या छाए बादल घनघोर।
जिसकी बातें दीप जलाएँ,
मिट जाए हर पीड़ा-शोर।
हाथ थाम जो साथ चले वो ,
हर मौसम मनमीत हुआ ।
जिसने मन को जीत लिया हो…
2
लोभ-मोह से दूर खड़ा हो,
सादा सदा रहा व्यवहार।
सच्चाई की राह दिखाए,
जिसमें हो विश्वास अपार।
जिसके संग सुकून मिले तो,
वो ही सच्चा प्रीत हुआ।
जिसने मन को जीत लिया हो…
3
नयनों में हो स्वप्न सुनहरे,
दिल में हो करुणा की धार,
दुख में भी मुस्कान अधर पर,
दृढ़ जीवन का है आधार।
ऐसा रिश्ता पा ले जो भी,
भाग्य सदा जयगीत हुआ ।
जिसने मन को जीत लिया हो…
4
जिसके अंतर दीप जले हों,
सत्य-धर्म का उजियारा।
झूठ-प्रपंच सदा भयखाते ,
मिटा सके मन अँधियारा।
मन की वीणा झंकार उठे तो ,
वही मधुर संगीत हुआ।
जिसने मन को जीत लिया हो…
5
करुणा जिसकी है विशेषता ,
सेवा जिसका है श्रृंगार।
अपनेपन की छाँव लुटाए,
ज्यों सावन की शीत फुहार।
जिसके संग हर पलछिन महके,
जीवन परम पुनीत हुआ ।
जिसने मन को जीत लिया हो…
— मंजूषा श्रीवास्तव “मृदुल”
