ग़ज़ल
ख़्वाब पलकें नए बो रही आज कल।शाम रानानियाँ जो रही आज कल दिल में यादों का इक कारवाँ चल पड़ा,रूह
Read Moreभारतीय संस्कृति में नवरात्र केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि आत्म शुद्धि और अंतर्मन के जागरण का दिव्य अवसर है।
Read Moreसमय के आईने में मनुष्यता का पुनर्पाठनव संवत्सर की देहरी परफिर आ खड़ा है समय—अधरों पर औपचारिक मुस्कान,और नेत्रों में
Read Moreसमय का चक्र निरंतर गतिमान है। हर वर्ष अपने साथ नूतन संभावनाएँ, आशाएँ और अनुभवों का विस्तृत आकाश लेकर आता
Read Moreतरुवर नद पर्वत झरने सब,जीवन का आधार है। संरक्षण इनका करने से,जन जन का उद्धार है। मानवता मानव का गुण
Read Moreजाता वक़्त कह रहा हमसे मन की गांठे खोलो प्रिय।दुर्भावना मिटा कर सारी मन को मन से जोड़ो प्रिय। चुक
Read Moreआँगन में खेलते बच्चों को श्यामा आवाज लगाती है ! चलो आओ खेलना बंद करो बच्चो !! देखो मैने भोजन
Read Moreकरनी गर नेक रखेंगे तो फिर यूँ पछताना कैसा?कुछ तो लोग कहेगे, बातों से डरजाना कैसा?जीवन की आपधापी संघर्ष कहानी
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