कल और आज
जी रहा यंत्रवत जीवन को ,दो पल सुकून के ढूंढ रहा |अनजान अजनबी सा मानव ,अब भी बिल्कुल न चेत
Read Moreदुर्लभ जीवन हुआ आज क्यूँ, मिलता नहीं जवाब है।महंगाई आकाश छू रही, टूट रहे नित ख्वाब हैं।आमदनी है एक रुपइया
Read Moreमाया मद के मकड़ जाल से जब मानव बच पाएगा।क्षणभंगुर मानव का जीवन पर पल-पल मुस्कायेगा। अमर न कोई इस
Read Moreस्वार्थ रहित कर्म सभी के ,सबकी नीयत नेक रहे।होता है कल्याण सुनो जब, कथनी करनी एक रहे।लक्ष्य वही पाते आये
Read Moreसावन शिव का पावन महिना, बम बम भोले बोलो रे।दूध दही घृत शिव अर्पण कर,शिव शिव शिव शिव जपलो रे।
Read Moreजिसने मानवता बिसरादी,वह हैवान कहाता है।मानवता का धर्म निभाना,ही ईमान कहाता है। नित तकरार मचाते रहना , छोटी छोटी बातों
Read Moreदिनांक 4 जून 2025 आर्य कन्या पाठशाला इंटर कॉलेज बादशाह नगर लखनऊ में समरकैम्प के अंतर्गत कविता एवं कहानी लेखन
Read Moreअप्रैल का महीना और गर्मी का ये आलम ,शीला का गर्मी के मारे बुरा हाल था।”सुनो जी ! मुझसे अब
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