कथनी करनी एक रहे
स्वार्थ रहित कर्म सभी के ,सबकी नीयत नेक रहे।
होता है कल्याण सुनो जब, कथनी करनी एक रहे।
लक्ष्य वही पाते आये है,अथक परिश्रम करते जो,
वही जीत लेते है जग को,आलस को तज देते जो,
उसे मिले चहुँ ओर सफलता,जो सदैव सविवेक रहे।
स्वार्थ रहित कर्म सभी के ,सबकी नीयत नेक रहे।
बुरे कर्म को तज दो यारो, जीवन नर्क बनादे यह,
लालच ईर्ष्या कपट दम्भ छल, घर परिवार मिटादे यह,
मानवता से पूर्ण जगत हो, इसका न व्यतिरेक रहे।
स्वार्थ रहित हो कर्म सभी के ,सबकी नीयत नेक रहे।
पर उपदेश कुशल बहुतेरे, इनको धूल चटाना है,
कथ नी करनी एक बने, ऐसे संस्कार गढ़ाना है,
गरिमा महिमा मंडित भारत,प्रेमप्रीत उद्रेक रहे।
स्वार्थ रहित कर्म सभी के ,सबकी नीयत नेक रहे।
मंजूषा श्रीवास्तव “मृदुल”
