पुरुषोत्तम मास आया
पुरुषोत्तम मास आया है, भक्ति का उपहार,
हरि स्मरण से भर उठे, सारा जीवन संसार।
अधिक मास कहलाता, पुण्य महीना खास,
जप-तप, दान व साधना से मिटे सारे त्रास।
गंगा-सा निर्मल बने, मन का हर एक विचार,
राम-कृष्ण के नाम से, जगमग होता संसार।
भक्ति की इस राह में, स्नेह बने बड़ा आधार,
दीन-दुखियों की सेवा कर मिलें सुख अपार।
वेद-पुराणों में गूँजे इसकी महिमा अपरम्पार,
विष्णुजी का प्रिय महीना, देता शुभ उपहार।
जो श्रद्धा से उपवास करें, रखते सच्चा ध्यान,
उसके जीवन में सदा बरसे हरिनाम का ज्ञान।
ये पुरुषोत्तम मास सिखाए, सेवा और सद्भाव,
तब मन मंदिर में दीप जले, मिट जाए दुर्भाव।
हरि चरणों में शीश धर, करें सभी का सत्कार,
पुरुषोत्तम मास लेके आया, मंगलमय त्योहार।
— संजय एम तराणेकर
