कविता
मधुबन में ही तो रंग बिरंगे फूल खिले
तितलियों भोरे के संग खूब लगे हो मेले
मधुबन से फूल चुराकर लगा लेती
जब वो बालों में
सौंदर्य देख दिल में कुछ कुछ होता है
मधुबन भी मिलन का मंदिर होता है।
— संजय वर्मा “दृष्टि”
मधुबन में ही तो रंग बिरंगे फूल खिले
तितलियों भोरे के संग खूब लगे हो मेले
मधुबन से फूल चुराकर लगा लेती
जब वो बालों में
सौंदर्य देख दिल में कुछ कुछ होता है
मधुबन भी मिलन का मंदिर होता है।
— संजय वर्मा “दृष्टि”