गीत
रघुनंदन श्रीराम प्रभु, जन्मोत्सव आज मनाएँ हम,
भक्ति-दीप जले उर-आँगन, प्रेम-धार बरसाएँ हम॥
आज अयोध्या सजी-धजी है, मंगल-गान सुनाती है,
द्वार-द्वार शुभ दीप जले, हर गली सुवास लुटाती है।
कौशल्या अंचल में किलकें, मंगल-गान सुनाएँ हम—
रघुनंदन श्रीराम प्रभु, जन्मोत्सव आज मनाएँ हम॥
दशरथ-मन उल्लास भरा, शंख-निनाद सुहाता है,
देवो की वंदन-वृष्टि संग , अंबर गान सुनाता है।
धरा-गगन पुलकित हो उठे, राम-नाम जय गाएँ हम—
रघुनंदन श्रीराम प्रभु, जन्मोत्सव आज मनाएँ हम॥
मर्यादा-करुणा के पोषक, हे श्रीराम, तुम्हारी जय हो,
दीन-बंधु, जन-पालनकर्ता, जग-आधार, तुम्हारी जय हो।
भव-सागर से पार लगाओ, चरण-शरण में आएँ हम—
रघुनंदन श्रीराम प्रभु, जन्मोत्सव आज मनाएँ हम॥
सीता-राम नाम सुखदायी, कल्मष-मल हर लेता है,
भक्ति-भाव में लीन “मृदुल” मन, चरण-कमल में रहता है।
तन-मन-प्राण समर्पित करके , प्रभु-गुण गान सुनाएँ हम—
रघुनंदन श्रीराम प्रभु, जन्मोत्सव आज मनाएँ हम॥
— मंजूषा श्रीवास्तव “मृदुल”
