उपहार
आज रिमी का जन्मदिन दिन है। सुबह से ही उसकी सहेलियां उसे फोन कर रही हैं लेकिन उसका फोन बंद
Read Moreहवेली के उस पुराने मेहराबदार दालान में वक्त जैसे थम सा गया था। बाहर पेड़ों की घनी छांव से छनकर
Read Moreज़ोया और राकेश की मुहब्बत के किस्से कभी स्कूल की तंग गलियों और कॉलेज के उन नीम के पेड़ों के
Read Moreउससे मेरी मुलाक़ात कोई बहुत पुरानी न थी, और न ही उसे मुकम्मल तौर पर ‘नई’ कहा जा सकता था।
Read Moreकॉलेज के वो दिन भी क्या ख़ूबसूरत होते हैं, जहाँ किताबों के पन्नों से ज़्यादा नज़रें हसीन चेहरों के मुताले
Read Moreबात उन दिनों की है जब मैं स्थानांतरित होकर इस घाटी में नया नया आया था और धारपुर के प्राइमरी
Read Moreदिल्ली की गलियां और वो पुर-असरार चेहरा पुरानी दिल्ली की वो तंग और तारीख़ (अंधेरी) गलियां, जहां हवाओं में आज
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