आख़िरी हिचकी का सफ़र
शहर के पोश इलाके में स्थित, संगमरमर से जुड़ा हुआ एक आलीशान बंगला। यह घर डॉ. जाकिर हुसैन का था,
Read Moreशहर के पोश इलाके में स्थित, संगमरमर से जुड़ा हुआ एक आलीशान बंगला। यह घर डॉ. जाकिर हुसैन का था,
Read Moreलगभग तीन बज रहे थे। पूरा आकाश काली पुतलियो से घिरा हुआ था। सभी विद्यालय की छुट्टी होने का बेसब्री
Read Moreरमेश के ऑफिस से आने के तुरंत बाद ही सुधा उसपर चिल्ला उठी ,अरे तुमने भी कैसे-कैसे कंगाल लोगों को
Read Moreविदेश में रहते हुए उसे कई वर्ष बीत गए थे। अच्छी नौकरी, अपना घर, पत्नी और बच्चों से भरा संसार—जीवन
Read Moreप्रिय अमन,मेरी आँखों के तारे, नूर‑चश्म,बेटा,तुम बचपन में मेरे कंधे पर सिर रखकर ज़िद किया करते थे, कभी नए खिलौने
Read Moreमहानगर की भागदौड़ भरी जिंदगी में सुबह भी जैसे घड़ी की सुइयों के इशारे पर होती है। यहाँ लोग बस
Read Moreदिन ढलते ही शहर की रौनक बदल जाती थी। एक तरफ़ इत्र की ख़ुशबू और दूसरी तरफ घुंघरूओं की झनकार।
Read Moreशाम का सहर तारी था, और कमरे में रखी पुरानी मेज़ लैंप की धीमी रोशनी में नहाई हुई थी। अनवर,
Read Moreशाम का वक्त था और पार्क के सुनहरी साए लंबे हो रहे थे। हवा में एक अजीब सा उदास सुकून
Read Moreशाम का वक्त था, कमरे में मद्धम रोशनी जल रही थी। मेज़ पर अबू की पुरानी डायरी रखी थी, जिसके
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