कहानी

एक और पागल प्रेमी

बस के आते ही मैं चढ़ गया। वहीं रोज के लगभग जाने-पह‌चाने चेहरे, रामा-श्यामा, नमस्ते! करके खड़ा हो गया। सीट पार्टनर बोला- “आज्या बैठ मैं तो अब उतरस्यूँ।” केसरजी गुरुजी मिले कई दिनों से। लड़की का विवाह किया 19 फरवरी को। फिर पीछे की सीट पर बैठ गया। वहाँ श्रद्वानाथ कॉलेज गुढ़ा गौडजी के राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर बैठे थे। उनके पास बैठ गया। इस कॉलेज में कुछ समय के लिए मैं भी गया था पढ़ाने, दोनों में देश-दुनिया की बातें हुई। उदयपुरवाटी आने पर आगे की सीट पर बैठ गया। केसर गुरुजी के पास की सीट खाली हो गई मैं उनके पास जाकर बैठ गया। बातें चलने लगी, बिना बात के बात ही चलती है और तो कुछ होने से गया। सोने-चांदी के भाव घटने- बढ़ने के कारणों, रूस-अमेरिका की संभावित डील से 2027 में सोने के भाव में गिरावट पर पर चर्चा हुई। वो गुहाला गाँव में उतर गये। मैं ‘चला’ गाँव में उतर गया। रोडवेज बस आई नहीं सवारियों का मेला लगा था। मैडम का पहले ही फोन आ गया कि आज रोडवेज आ रही है। फिर भी समय पर नहीं आई तो चिंता हुई। मैडम को फोन घुमाया – हाँ मैडम जी! बस निकल गई क्या?, नहीं! पिछले घुमाव में ही सवारी उतार रहा है जयपुर की सवारी ले रहा बस कंडक्टर। कंडेक्टर रोजवाला है क्या?
नहीं! लेडीज है। ठीक !
बस आई, मैं घुमाव की तरफ चला गया, बस चालक को लम्बा इशारा किया, जयपुर जाऊँगा कह कर चढ़ गया। बस खचाखच भरी थी। पर सीट मिलने की आशा में पीछे चला गया। सीट नहीं मिली। वहाँ खड़ा हो गया सीट का सहारा लेकर। पास की सीट पर एक लड़का बैठा था। बाल बडे़-बडे़, दाढी बढ़ा रखी थी, पतली देह ! कमर में पेंट ढीली। हाथ में मोबाइल था। बहुत व्यस्त था मोबाइल में। मैंने सोचा कोई तकनीशियन होगा। लेकिन उसके शारीरिक हाव-भाव से कामुक व्यस्क युवकों की सी हरकत लग रही थी। फिर क्या! मैं भी उसे ताड़ने लगा। वो इंस्टाग्राम की रील देख रहा था। बार-बार में इंस्टाग्राम चैट को खोल रहा था। फिर किसी को मैसेज भेजने लगा। मैंने ध्यान नहीं दिया। लेकिन उसकी हरकत से मुझे शक होने लगा। उसमें उत्तेजना का भूत का सवार हो रहा था। दोनों टांगों के बीच में हाथ डाल रहा था। बार-बार चैटिंग कर रहा था।
बस खचाखच भरी थी दुनिया मेंं किसको इतनी फर्सत कि किसी का ध्यान रखे। देश में क्या हो रहा है। सबको सीट की चिंता, राजनीति हो या कूटनीति, बस हो या रेल, घर हो या बाहर सबको सीट चाहिए। हम को तो सीट (ताकत) नहीं, हम तो साहब वो जनता है जो दुनिया को सिर के बल देखते हैं।

वो लड़का चैट कर रहा था। मैंने गौर से देखा। मैसेज पढ़ा। मैसेज से लगा लड़का होगा। मैसेज था ‘आराम से सो जा।’ फिर वो रील देखने लगा। रोमांस वाली रील देखी। लेकिन बार-बार चैट बॉक्स को खोलता है बंद करता है। मेरा शक गहरा हो गया, पक्का ही किसी लड़की का मैसेज है। लेकिन लड़का बैचेन हो रहा था
उधर से कोई मैसेज नहीं आ रहा था। लड़के ने मैसेज भेजा- ‘रात को सोई नहीं थी क्या?’ मैसेज की क्रिया ने लिंग का शक पूरा किया। लड़की को मैसेज भेजा है। तभी तो ‘सोई’ क्रिया आई।
थोड़ी देर बाद उधर से भी मैसेज आया,फिर क्या ? धड़ाधड़ मैसेज टाइप करने लगा। इधर से उधर से मैसेज की बाढ़ आने लगी।
मैं अब शुरू से पढ़ने लगा उनके मैसेज- -रात को सोई नहीं की क्या ?
-नहीं!
-क्यों ?
(लड़की का मैसेज नहीं आया, उसकी हालत बैचेन होने लगी, उत्तेजना का ज्वर था) बाढ़ के ज्वार को कौन रोक पाया है। जिसने कोशिश की उसी की तबाही हुई है।

वो लड़का फोन की गैलेरी में कुछ फोटो देखने लगा , मैंने भी देखी। एक लड़की की फोटो थी। पाँच-चार फोटो का चयन करके हाइड एप में छपा दिया। तब लगा पक्का लफडे़बाज है। लड़की की फोटो सुंदर थी। मैं भी खुश हो गया।

इतने में लड़की ने एक पाँच सैकेंड का विडियों भेजा उसमें लड़‌की के चेहरा रंग-बिरंगा था शायद रंग लगा हो, या फोटो एडिट का कमाल होगा। चाय के कप से शायद कॉफी पी रही थी? कुछ भी हो, मुझे क्या? लड़की कोई 16-17 साल की सी लगी।
फिर मैसेज भेजने लगा –
मैं शुरू से मैसेज पढ़ने लगा। मुझे मजा आ रहा

आराम से सो जा। (लड़की का मैसेज था, इसके बाद काई मैसेज नहीं है, फिर लड़के ने मैसेज भेजा)

-रात को सोई नहीं थी क्या?

नहीं! (मैं भी लड़के-लड़की के इमोशन में ही पढ़ रहा था)
-क्यों ?
( लड़‌का बैचेन हो गया, कई देर तक मैसेज नहीं आया)
( फिर एक शोर्ट विडियों भेजा लड़की ने, लड़का – बार-बार देखता है।, फिर लड़की ने मैसेज भेजा)
-रात को 04:47 पर सोई
-इतने लेट क्यों?
(विडियों को फिर देखता है, मैसेज भेजता है)
-तुम्हारी आँखें तो सूज गई, एक काम करो तुम नींद लो।नींद पूरी हो जायेगी तो आराम मिलेगा।
(कई देर तक फिर मैसेज नहीं आया, लड़‌का बैचेन हो गया। फिर विडियों देखा, खुद ही मैसेज भेजा)

-और सुनाओं,सब ठीक है और बताओं
-उसने मुझे धोखा दिया है
-मैंने एक डील की है-
-तुम मेरा एक काम करोगे ?
बताओं
मैं उससे बदला तो जरूर लूँगी मा….. (ये भंयकर गाली थी, माँ की) साला
-तुम कुछ मत करना, सब भूल जाओं टेंशन मत लो।
-उसकी शादी वाले दिन मुझे ले चलना मुझे वहाँ छोड देना। बाकी काम मेरा
-क्या करोगी?
-रुलाऊँगी, साले को उसकी बहू को हम दोनों की फोटो गिफ्ट कर दूंगी जो मैंने अपने फोन में ली थी। फिर रोयेगा, जिंदगी भर मा…(फिर वही भद्दी गाली) साला
-तुम कुछ मत करना। पागल हो गई क्या? 2-4 दिन में मैं पाली- चित्तौडगढ़ जाऊँगा घूमने और कुछ काम भी है।
मैंने एक डील की है उससे
(प्यार में पागल-पगली शब्द बहुत अच्छा लगता है,पटाने का आजकल का सबसे प्रसिद्ध शब्द है और सच में लड़के-लड़की प्यार में पागल हो जाते है।)
-डील मतलब?
-तुम चलोगी घूमने
-नहीं, यार! बहुत दूर है
-चलो ! घूमा लाऊंगा
-घरवाले जाने नहीं देंगे

( फिर मैसेज आना रुक गया)
लड़का बार-बार उस विडियों को बीच-बीच में देखता है। लड़की को सहानुभूति वाले मैसेज भेजकर उसे पटाना चाहता है। लड़की पट जाये इसलिए उसे केयर मैसेज, भावुक, सहानुभूति भरे मैसेज भेज रहा था। ये लड़कियों को पटाने के कारगर तरीके है।

वो बार-बार ऊपर, आस-पास देख रहा था कि कोई मैसेज पढ़ रहा है क्या? वो जैसे ही देखता है मैं आँख बंद कर लेता हूँ, उसको लगा मैं सेफ हूँ। वो बार-बार उस विडियों को देख रहा, रील देखता, चैट बॉक्स खोलता, उसकी उत्तेजना ने उसे बैचेन कर दिया।

फिर मैसेज बॉक्स को खोल -मैंने देखा ये किससे बात कर रहा है-
उस लड़की की आईडी R.@praditi’ नाम से थी। फिर ! बैचेनी होने लगी, मोबाइल का लॉक खोलता है, बंद करता है।
फिर चैट बॉक्स खोलता है। फिर किसी और को मैसेज भेजता है-
मुझे लड़‌के की दशा पर तरस आया। फिर से किसी और को मैसेज करने लगा वो किसी लड़के को मैसेज भेजता होगा- मैसेज था
‘यार! उसने मुझे पेपर भेजा ही नहीं।’ साफ था ये मैसेज तो भाषा के हिसाब से लड़के का था।
इतने में बस कंडेक्टर बोली किराया,टिकट ले ली। मैंने सौ का नोट दिया और कहा- ‘चला से अजीतगढ’। इतनी देर क्यों नहीं ली? आवाज लगाई थी। नहीं सुनी, पिछे आते। इतने में सवारी बोल पड़ी पड़ी ‘थोई’ से बैठा है, थोई जा चुका है। उसने सत्तर रुपये वापस दिये। थोई से अजीतगढ़ के 20 रुपये की टिकट थी। उसने 10 ज्यादा ले लिये। चलो कोई बात नहीं बहिन-बेटियों को तो देते ही है।
मेरा मन बहस में नहीं,उस लड़के के चैट बॉक्स में था। वो फिर से मैसेज टाइप कर रहा था। मैं पढ़ने लगा –
-” यार। उसने मुझे पेपर भेजा ही नहीं।”

क्यों?
उसको लगता है वो पेपर किसी और के पास भी भेज सकती हूँ।
(मेरा माथा ठनक गया, यहाँ भी लिंग परिवर्तन क्रिया का, मैं अब समझ गया सारा मैटर। एक नहीं तो दूसरी, नहीं तो तीसरी, उत्तेजना तब तक नहीं मिटेगी जब तक कोई पट नहीं जाती,प्यार भरी कामुक बातें नहीं होने लगे तब तक ये दौर दौरे के समान आते ही रहेंगे।
फिर कोई मैसेज नहीं आया, उसने स्क्रीन की लाइट कम कर दी, फोन जेब में रख किया ।
मैं भी उदास हो गया। याद करने लगा ये दौर हमारे समय तो आया नहीं? मैं वहाँ से हटकर आगे बढ़ने लगा बस के गेट की ओर, उसी वक्त उसने फिर फोन निकाल लिया, मैं भी रुक गया।
उसने चैट खोली – टाइप करने लगा –

सब ऐसे ही है आजकल

कोई मुझसे दोस्ती करता है तो मैं अंत तक साथ निभाती हूँ बीच में नहीं छोड़ती(लड़की का मैसेज)
-मेरा भी यही है, कोई मुझसे दोस्ती करता है तो मैं अंत तक साथ देता हूँ, अगला ही छोड़ देता है, मैं नहीं।
-रब ने बना दी जोड़ी (लकड़ी ने भेजा, लड़का पढ़ते ही मुस्कुराया, मैं भी समझ गया फैंस रहा, फँसा लेगा)

एक बात पूछूँ
सच-सच कहना
अगर तुमको मुझसे शादी करने का मौका मिले तो क्या तुम शादी करोगे, मुझे जयपुर रखोगे?
सच कहना।
(लड़‌का शादी का खुला ऑफर पाकर दंग रह गया, गुदगुदी सी होने लगी लेकिन अगली लाईन पढ़ते ही मुसीबत में पड़ गया, न हाँ कहते बना न ही ना कह सका)
उसे मुझे मैसेज पढ़ते शायद देख लिया, इसलिए स्क्रीन की लाईट बिलकुल कम कर दी। मुझे जलन होने लगी स्क्रीन की लाइट कम कर दी लगी उस लड़के ने इसलिए।
अच्छा-भला टाइम पास हो रहा था। कोई बात नहीं बेटा जी! मैं तो पढ़ूँगा मैसेज मन में ठान लिया। वो टाइप करने लगा।
इतने में बस कंडक्टर ने आवाज दी अजीतगढ़ वाले आगे आ जाओ। सचमुच अजीतगढ़ आ गया, पता भी नहीं चला सफर का। जाते-जाते उसे छोड़‌ने का मन किया। मैंने कहा – स्क्रीन की लाइट तो बढ़ा दे यार!
मैं कौनसा उसको जानता हूँ, तुमको डर किस बात का? मजा आ रहा था। फिर उतरने के लिए भीड़ को चीरते हुए आगे बढ़ा।
पीछे मुड़कर उस लड़‌के को आवाज दी चलता हूँ प्रेमभाई। (और आँखों से इशारा कि लगे रहो।)

— डॉ. ज्ञानीचोर

डॉ. ज्ञानीचोर

शोध व कवि साहित्यकार मु.पो. रघुनाथगढ़, जिला सीकर,राजस्थान मो.9001321438 ईमेल- binwalrajeshkumar@gmail.com