मेरी डायरी के पन्ने
मेरी डायरी के ये धूल-धूसरित, उदास पन्ने और उनकी हर पंक्ति में सांस लेती तुम्हारी स्मृतियां…आज फिर मैंने इन्हें पलटा,
Read Moreमेरी डायरी के ये धूल-धूसरित, उदास पन्ने और उनकी हर पंक्ति में सांस लेती तुम्हारी स्मृतियां…आज फिर मैंने इन्हें पलटा,
Read Moreमैं अपने बरामदे में बैठा पहाड़ों की खूबसूरती को देख रहा था । इस बार कई सालों के बाद मैं
Read Moreशाम ढल रही थी, और रेलवे स्टेशन के पुराने पीपल के पेड़ पर परिंदों का शोर धीरे-धीरे थम रहा था।
Read Moreचंबल की सुलगती फ़िज़ाओं में सिर्फ़ बारूद की तीखी गंध और ख़ून के कतरे ही नहीं तैरते थे, बल्कि एक
Read Moreयह उस दौर की बात है जब इश्क़ ज़मानों और सरहदों का मोहताज नहीं हुआ करता था, बल्कि दो दिलों
Read More(1)मुरलीधर रिक्शा से उतरे। मालती को भी उतरने का संकेत किया।“यह फलों की टोकरी कहाँ रख दूँ बाबू जी!” रिक्शावाले
Read Moreशाम की छाया गहरी हो रही थी। महाविद्यालय की उस पुरानी और ऐतिहासिक पुस्तकालय की खिड़की से बाहर का दृश्य
Read Moreआज सुलेखा के पांव जमीं पर नहीं पड रहे थे। पाँखों में हौसले का बल भर ऊँची उड़ान भरने में
Read Moreसत्या बहू भाग भाग कर सारी तैयारी कर रही थी। तभी किसी ने पीछे से कंधे पर हाथ रखा –
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