खामोश दरख्तों की गवाही
केरल के घने और हरे-भरे मन्नार के जंगलों के बीच से गुज़रती वह सड़क किसी भूल-भुलैया से कम न थी।
Read Moreकेरल के घने और हरे-भरे मन्नार के जंगलों के बीच से गुज़रती वह सड़क किसी भूल-भुलैया से कम न थी।
Read Moreआज पूरे ऑफिस में अजीब-सी हलचल थी। किसी की मेज पर मिठाई के डिब्बे थे, तो किसी के हाथ में
Read Moreविमल सुबह नौ बजे ही पहुँच गया था मेरे घर। हम दोनों को अपने पुराने मित्र से मिलने शहर से
Read Moreकॉलेज की फिज़ाओं में एक नाम गूंजता था, अमन आरिफ़। वह एक संजीदा फ़िक्र नौजवान, जिसकी दुनिया किताबों, शायरी और
Read Moreशहर की सुबहें हमेशा भागमभाग वाली होती हैं। ट्रैफ़िक का शोर, हॉर्न की आवाज़ें, और टैक्सी स्टैंड पर भीड़। उसी
Read Moreखटपट की आवाज़ से नंदिता की नींद खुली। उठकर देखा तो माँ कावेरी आज तड़के ही उठ कर घर के
Read Moreठाकुर श्याम सिंह के पूछने पर कि हरिया तेरे घर में लड़का पैदा हुआ है कि लड़की, तो उसने अपनी
Read Moreबस के आते ही मैं चढ़ गया। वहीं रोज के लगभग जाने-पहचाने चेहरे, रामा-श्यामा, नमस्ते! करके खड़ा हो गया। सीट
Read Moreजब – जब कोई त्यौहार आता है, बाजारों की रौनक, चहल-पहल बढ़ जाती है। होली का त्योहार , दीपावली का
Read More