किस्मत – 8
इधर कॉलेज से घर पहुँचते ही विपुल बिस्तर पर ढह गया।लेकिन दिमाग में बार-बार वही पल घूम रहा था —जब
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Read Moreआख़िरकार मासाब का पुराना मकान मिल ही गया।नंदू बड़ी खुशी और हल्की घबराहट के साथ शहर पहुँचा था। उसका बेटा
Read Moreकुछ दिन बाद कॉलेज में कल्चरल प्रोग्राम था और सभी उसकी तैयारियों में बिजी थे। पर सुमि तो अपनी ही
Read Moreरात का पूरा वक़्त सुमि के लिए किसी सपने जैसा बीता था। पिछली शाम की हर एक बात उसके दिल
Read Moreकॉलेज का वातावरण अब पूरी तरह रंग पकड़ने लगा था। विद्यार्थियों ने अपनी-अपनी मंडलियाँ बना ली थीं—कहीं हँसी-ठिठोली के साथ
Read Moreपाँच दिन की छूट्टियाँ बिता कर जब ससुराल पहुँची तो पति घर के सामने स्वागत में खड़े थे। अंदर प्रवेश
Read Moreमहेश और सुरेश दोनों सगे भाई, लेकिन दोनों के व्यवहार में जमीन- आसमान का अंतर! यहां तक की एक तो
Read Moreकश्मीर की वादियों में उस सुबह झेलम की धारा कलकल करती बह रही थी। डल झील पर हल्की धुंध तैर
Read Moreलाइब्रेरी की बड़ी-बड़ी खिड़कियों से दोपहर की सुनहरी धूप लंबी लकीरों की तरह अंदर उतरकर किताबों पर बिखर रही थी।
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