कहानी – पंचायतनामा
“मैनवा” यही उसका बपौती नाम था। नाम के पीछे छुपे कारनामों का पता आपको खुद ब खुद लग जायेगा। पैंतालीस
Read More“मैनवा” यही उसका बपौती नाम था। नाम के पीछे छुपे कारनामों का पता आपको खुद ब खुद लग जायेगा। पैंतालीस
Read Moreइंस्पेक्टर की बात से मुझे बेहद राहत मिली थी पर मुझे उसने जो बार – बार लौंडा कहा था वो
Read Moreभाद्रो की तपती गर्मी, लूं की सनसनाती हवाएं, तो माघ की तपती सर्दी, कभी मौसम उनके कामों में आड़े नहीं
Read Moreसुबह सुबह के सूरज की अल्हड़ किरणें घर के छोटे से जँगले के किवाड़ की झीरी में से घर के
Read Moreदिसंबर का महीना घोर सर्दियों के दिन।मैं कमरे में बैठा हीटर सेंक रहा था और टीवी पर समाचार देख रहा
Read Moreसेठानी ने सेठजी से पूछा -” खाना खा लिया। “सेठजी गल्ले की चाभी दराज में रखते हुए बोले – ”
Read Moreसुरजीत एक हफ्ते की छुट्टी काटकर वापस ड्यूटी पर जा रहा था। सुबह आठ बजे घर से चला था और
Read Moreमिट्टी की उन पगडंडियों पर, जहाँ सुबह‑सुबह धूप भी संकोच से उतरती है, एक छोटी‑सी लड़की आज फिर घर की
Read More