कविता

दर्द की दास्ताँ

दर्द इतना दिया तुमने कि,
कभी भूल न पाऊँ मैं,
इन गलियों में राह तकता रहूँ,
पर टूटे सपनों को जोड़ न पाऊँ मैं।

ज़िंदगी है, इसलिए ज़िंदा हूँ,
सिर्फ जीने के लिए,
वरना कब का मिट गया होता,
इस दुनिया में नाम पाने के लिए।

मैं और मेरी साँसें अब भी,
यूँ ही चलती रहती हैं,
शायद किसी अधूरी चाह में,
या तेरी यादों के सहारे रहती हैं।

काश ये दुनिया न होती,
न मैं होता, न ये दर्द होता,
इन अनजाने घावों को सहने का,
फिर कोई मजबूर सफ़र न होता।

अब किससे कहूँ अपने दिल की बात,
जब मैं खुद से ही दूर हो गया हूँ,
अपने ही दर्द को समझाने में,
जाने कब से मजबूर हो गया हूँ।

तुम और मैं कभी थे,
एक ही डाली के दो फूल,
तू चहकती तो मेरी साँसें ठहर जातीं,
तेरी हँसी से महक उठता था सारा उसूल।

तू हँसती तो बगिया खिल उठती,
तू रोती तो दुनिया थम जाती,
तेरी हर धड़कन से मेरी धड़कन,
अनजाने ही जुड़ सी जाती।

शायद इस दुनिया को मंज़ूर न था,
हमारा साथ यूँ उम्र भर का,
तुम मुझे छोड़कर चली गईं,
और रुक गया समय मेरे सफ़र का।

आज भी दिल में एक सवाल है,
कैसे कहूँ तुझसे अपने जज़्बात,
तू दूर होकर भी पास लगती है,
और अधूरी रह गई दिल की हर बात।

— रूपेश कुमार

रूपेश कुमार

भौतिक विज्ञान छात्र एव युवा साहित्यकार जन्म - 10/05/1991 शिक्षा - स्नाकोतर भौतिकी , इसाई धर्म(डीपलोमा) , ए.डी.सी.ए (कम्युटर),बी.एड(फिजिकल साइंस) वर्तमान-प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी ! प्रकाशित पुस्तक ~ *"मेरी कलम रो रही है", "कैसें बताऊँ तुझे", "मेरा भी आसमान नीला होगा", "मैं सड़क का खिलाड़ी हूँ" *(एकल संग्रह) एव अनेकों साझा संग्रह, एक अंग्रेजी मे ! विभिन्न राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओ मे सैकड़ो से अधिक कविता,कहानी,गजल प्रकाशित ! राष्ट्रीय साहित्यिक संस्थानों से सैकड़ो से अधिक सम्मान प्राप्त ! सदस्य ~ भारतीय ज्ञानपीठ (आजीवन सदस्य) पता ~ ग्राम ~ चैनपुर  पोस्ट -चैनपुर, जिला - सीवान  पिन - 841203 (बिहार) What apps ~ 9934963293 E-mail - - rupeshkumar01991@gmail.com

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