डूबते सूरज की लाली में उनकी ज़िंदगी का नया सफ़र चमक रहा था
लाइब्रेरी की बड़ी-बड़ी खिड़कियों से दोपहर की सुनहरी धूप लंबी लकीरों की तरह अंदर उतरकर किताबों पर बिखर रही थी।
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Read Moreट्रेन में हुई उस मुलाक़ात को कई महीने बीत चुके थे, लेकिन समीर चाह कर भी कुछ भूल नहीं पा
Read Moreघर के आँगन में पीपल का पुराना पेड़ खामोशी से खड़ा था। उसकी छाँव में खेलते हुए बीते साल जैसे
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Read More“By the way, I’m kashish “, वह लड़की मुस्कुरा कर बोली। और मैं… इससे पहले कि विपुल खुद अपना नाम
Read Moreगर्मियों की छुट्टियों के समय कन्फर्म सीट मिलना कोई आसान बात न थी । भतीजी की सगाई एकदम से तय
Read More“लो भागवान ! आ गए ट्रांसफर के आर्डर। चलो अब दिल्ली चलने की तैयारी कर लो।” सुमि के पिता जी
Read Moreनंदिता रोज अपनी लिखी एक कविता फेसबुक पर पोस्ट करती। सुबह फ्रेश होने के बाद चाय पीकर कविता लिखने बैठ
Read Moreरीता जी एक बैंक में कैशियर के पद पर कार्यरत हैं। पतिदेव एक मल्टीनेशन कंपनी में जनरल मैनेजर है ।
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