हाइकु – नदी
1 जीवन रेखाअदृश्य सी हो रहीनदी की व्यथा2नदी का जलबहेगा अविरलरखो निर्मल3बहती नदीदेती एक संदेशचलते रहो — निर्मल कुमार दे
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Read Moreनंदिता रोज अपनी लिखी एक कविता फेसबुक पर पोस्ट करती। सुबह फ्रेश होने के बाद चाय पीकर कविता लिखने बैठ
Read More“हैलो !” एक अनजान नंबर से महिला की आवाज आई।दीपक थोड़ी -सी घबराहट से जवाब देते हुए कहा,”जी…नमस्ते।”“मैं सुधा बोल
Read More“देखो अपने गाँव का अमित पूरे प्रखंड में अव्वल आया है मेट्रिक की परीक्षा में।” दीपक बाबू ने कहा।“अरे वाह।
Read Moreमैं भी बुन रखी थीअपने सपनों की एक दुनियाएक झोंका ऐसा आयाबिखर गए सारे धागेकुछ न बचा सिवायएक रीतापन के;काश
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