कहानी – दीप से दीप जलाना
नंदिता रोज अपनी लिखी एक कविता फेसबुक पर पोस्ट करती। सुबह फ्रेश होने के बाद चाय पीकर कविता लिखने बैठ जाती।दस मिनट अपनी कविता पर लोगों द्वारा की गई टिप्पणियों को देखती, टिप्पणियों पर धन्यवाद या इमोजी पोस्ट करती फिर अन्य कामों में जुट जाती। पचास साल की नंदिता देखने में जितनी सुंदर थी उतनी ही सुंदर उनकी सोच थी। उसकी डीपी देख वह तीस से ज्यादा की नहीं लगती।
“मैडम मैं आपकी कविता रोज पढ़ता हूँ।बहुत अच्छी लगती हैं आपकी कविताएँ।। मैं भी कविता लिखता हूँ।पर अभी तक पोस्ट नहीं किया है। आप मेरा मार्गदर्शन करती तो मैं भी पोस्ट करने का साहस पाता।” नंदिता ने देखा आज की कविता के कमेंट बॉक्स में नीरज कुमार ने लिखा है।
नंदिता ने अपनी कविता के कई पुराने पोस्ट को देखा,सबमें नीरज की टिप्पणी है, सटीक और शालीन।
नंदिता को अपने कॉलेज के दिन आ गए। किस तरह लड़के उससे दोस्ती करने के लिए पागल से हो जाते थे। सोलह सत्रह साल की उम्र किसी भी लड़के या लड़की के लिए भावुकता से भरी होती है। नंदिता ने खुद इसे महसूसी है।
कहीं यह लड़का भावुकता वश तो नहीं लिखा है,नंदिता के मन में शंका हुई।
“आप अपनी कुछ बातें मैसेंजर पर शेयर करें।” शाम को नंदिता ने नीरज के कमेंट के जवाब में लिखा । नीरज ने तुरत मैसेंजर पर नंदिता को गुड इवनिंग के साथ प्रणाम की इमोजी भेजा।
“नीरज आप क्या करते हैं” नंदिता ने पूछा।
“मैडम मैं कॉलेज में अभी पढ़ता हूँ।मैथ ऑनर्स है मेरा।”
साइंस में पढ़ता है और कविता में दिलचस्पी! नंदिता को कुछ आश्चर्य हुआ।
फिर नीरज ने पोस्ट किया।
“मैडम कृपया मुझे आप संबोधन न करें।मुझे अपना छात्र मान तुम कहें।”
नीरज के इस जवाब से नंदिता को ख़ुशी हुई।
“ठीक है नीरज तुम अपनी एक दो कविता भेजो। मैं देखती हूँ।” नंदिता ने टाइप किया।
“जी मैडम।” नीरज ने अपनी लिखी दो कविताएँ नंदिता के मैसेंजर पर भेज दी।
नंदिता ने देखा दोनों कविताएँ स्तरीय है। एकाध जगह लिंग वचन की गलती है। उसने सोचा नीरज में प्रतिभा है। इसे निखारने की जरूरत है। दीप से दीप जलाना चाहिए।
“नीरज !तुम्हारी दोनों कविताएँ अच्छी हैं।थोड़ी -बहुत गलती है।तुम कहो तो इसे सुधार देती हूँ,फिर तुम पोस्ट कर देना फ़ेसबुक पर।
“जी मैडम,आपकी असीम कृपा होगी मुझपर।”
नंदिता ने कविता की त्रुटि दूर कर दी।एक दो शब्दों को बदल भी दिया। नीरज ने इमोजी का प्रयोग कर आभार व्यक्त किया।
“तुम लिखते रहना।लेकिन अपनी पढ़ाई से ध्यान न हटे। साइंस के छात्र हो।हिंदी को भी मजबूत करने के लिए हिंदी की कोई अच्छी ग्रामर की किताब समय -समय पर पढ़ने की कोशिश करना।”
“बहुत बहुत धन्यवाद मैडम।आपके चरणों में सादर प्रणाम।नीरज ने नंदिता के प्रति अपना आदर और सम्मान व्यक्त किया।
“तुम्हारी एक दो कविता फेसबुक पर देखने के बाद तुम्हें ‘नई क़लम’ ग्रुप में जोड़ दूँगी। साहित्यिक ग्रुप है। अपनी लेखन प्रतिभा को चमकाने के लिए एक सही मंच की जरूरत है।बस खुश रहो।” नंदिता ने टाइप किया।
“बहुत बहुत धन्यवाद और सादर प्रणाम मैडम!” नीरज गद-गद हो गया। नंदिता को लगा आज उसने अपनी बाती से दूसरा दीप जलाया।
— निर्मल कुमार दे
