मुक्तक/दोहा

भूमि बचाओ

जनता ने खुद से किया,अपना सबकुछ नाश |
हमें जरूरत बना रही,चलती फिरती लाश ||

तू इसको खा नोच के,मैं इसको लूं नोच |
संसाधन को नोच लो,यही रही है सोच ||

अभिलाशायें कम करो,साफ करो आकाश |
आने वाली नस्ल को,मिलता रहे प्रकाश ||

अपनी भूमि बेच कर,बन गये हम मजदूर |
बड़ी कम्पनी कर रही,मरने को मजबूर ||

सुख की पूंजी छोड़ कर,अपना लिया कलेश |
बेवकूफ जन सोचते,है विकास पर देश ||

ये नेता जब चल बसे,लेकर कर्ज उधार |
कहेगीं इनकी आत्मा,जाकर कर्ज उतार ||

— शालिनी शर्मा

शालिनी शर्मा

पिता का नाम-स्वर्गीय मथुरा प्रसाद दीक्षित माता का नाम -श्रीमती ममता दीक्षित पति का नाम-श्री अनिल कुमार शर्मा वर्तमान स्थायी पता- केऐ-16 कर्पूरी पुरम गाजियाबाद फोन न0- 9871631138 जन्म एंव जन्म स्थान-09.04.1969, परीक्षित गढ़ गाजियाबाद उप्र शिक्षा एवं व्यवसाय-बीएससी बीएड़,अध्यापिका व सहायक NCC आफिसर (13 यूपी गर्ल्स बटालियन) प्रकाशित रचनाएं एवं विवरण-अमर उजाला काव्य में 48 रचनायें प्रकाशित, विभिन्न पत्रिकाओं में रोज रजनाएं प्रकाशित होती हैं,दो तीन सम्मान प्राप्त

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