साहित्य की ऐसी तैसी
भाई भरोसे लाल अपने बच्चों के पास विदेश पहुंच गए । जब वे विदेश पहुंच ही गए तो वह वहां
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Read Moreभाई भरोसे लाल हमारे मोहल्ले के नामी आदमी है। नामी इस लिए हैं कि उन्हें बस नाम से मतलब चाहे जैसे
Read Moreमेरे मित्र भाई भरोसे लाल मुझे अक्सर कहते रहते हैं कि झूठ के पैर नहीं होते हैं पर मैं उनकी
Read Moreपिछला चुनाव जीतने क के बाद तो टप्पू चौधरी ठीक-ठाक था हमारे प्रधान जी से उसकी बहुत गाढ़ी वाली यानी
Read Moreउन के पास भी पान के पत्ते वाली आकृति है और इन के पास भी यही पान के पत्ते जैसी
Read Moreएक दिन मेरे मित्र भाई भरोसे लाल सुबह सुबह ही आ धमके। मैं कहीं जाने को तैयार हो रहा था।
Read Moreएक दिन मेरे मित्र भाई भरोसे लाल सुबह सुबह ही मेरे घर आ धमके और बोले कि सरकार के विरुद्ध
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