व्यंग्य – न्यूज बनाम न्यूज
आजकल के न्यूज चैनल खोलते ही समाचार नही बल्कि चटखारे मसाले सुनने को मिलता हैं, भारतीय मनुष्य के जीवन में
Read Moreआजकल के न्यूज चैनल खोलते ही समाचार नही बल्कि चटखारे मसाले सुनने को मिलता हैं, भारतीय मनुष्य के जीवन में
Read Moreआज रिटायर्ड होने पर कॉलेज के हर तरफ आंसू का सैलाब बह रहा था।प्रोफेसर साहब चुपचाप ऑफिस में बैठकर अपने
Read More16 सितंबर 2008.. कुछ यादें सिर्फ तारीख में दब कर रह जाती हैं,ये तारीख बीते करीब 17 साल बीत चुके
Read Moreउत्तर प्रदेश में सबसे पहले पूर्व मुख्यमंत्री मायावती का चुनावी रणनीति बेहतर लगता था, दलित,अतिपिछड़ों और मुस्लिम वोटों का गठजोड़
Read Moreवो प्यासा मर गयाकुंआ के मुंडेर पर,सच में उसे कुएं सेपानी निकलनाआता नहीं था,बस बड़ी बाते बनानाउसकी फितरत थी,वो पानी
Read Moreयमराज के सामने मुझ गरीब लेखक की गरीब आत्मा को पेश किया गया, यमराज के सामने सभी सीट पहले से
Read More1.अभी का दृश्य नायक सड़क के किनारे बैठा राह पर अपने प्रेयसी को आने का इंतजार कर रहा था, अचानक
Read Moreएक दिन काम से लौटते समय पत्नी का फोन आया, वो कुछ सब्जी लाने के लिये बोली। आगे बाजार में
Read Moreमौत के बिस्तर पर पड़ेउम्र के उस मोड़ पर कब शरीर साथ हमाराछोड़ दे,बच्चे तो साथ नहींउनके रुतबे के हिसाब
Read More