कविता

उसकी डायरी मेरा नाम

16 सितंबर 2008..

कुछ यादें सिर्फ तारीख में दब कर रह जाती हैं,
ये तारीख बीते करीब 17 साल बीत चुके हैं।
लेकिन उस समय की यादे ऐसा लगता मानो कल की बात हो,
जीवन का पहला प्यार जो चेहरे पर उदासियां के साथ खुशियों की मुस्कान फेर देती हैं।
आज बहुत खुश हूं,
उसकी डायरी मेरे हाथ में रही
उसके एक-एक शब्दों में दिल के जख्म को खोज रहा था।
वैसे अब के नई पीढ़ी डायरी नहीं लिखते,
कोई बहुत बड़ा क्रांतिकारी होगा जो रोजमर्रा के जिंदगी को डायरी में लिखकर अपने अनमोल पल को कैद कर लेता हैं।
जानते हो अपनी लिखी डायरी को 5 साल बाद पढ़ो उसमे लिखा दुःख पर आपको हंसी आयेगी,
फिलहाल जीवन के पिछले पहलू से भविष्य में कुछ नया सीखने का बढ़िया अवसर भी मिलता हैं,
उसने 16 सितंबर की डायरी में लिखा था कि
“जहां दर्द मिलता वहीं प्रेम भी होता हैं प्रेमिका के जीवन का यही आधार होता हैं,
सच कहूं रचित जी जब आप क्लास में मेरे सामने बैठे होते हो,
तब आपको लगातार देखती हूं।
ईश्वर से प्रार्थना करती हूं
ये पल यही रुक जाये
तुमको जी भरकर नजरों में कैद कर लूं।
मन को शांति मिलता हैं,
काश तुम मुझसे बात करते
मुझे बहुत खुशी मिलती
उसे सपना बना लेती
एक लंबी नींद में चली जाती,
तुमसे मिले हर खुशियों को संजोना चाहती हूं।
आज के डायरी में मेरा इतना ही शब्द
कल के बारे में
क्रमशः

— अभिषेक कुमार शर्मा

अभिषेक राज शर्मा

कवि अभिषेक कुमार शर्मा जौनपुर (उप्र०) मो. 8115130965 ईमेल as223107@gmail.com indabhi22@gmail.com