व्यंग्य – न्यूज बनाम न्यूज
आजकल के न्यूज चैनल खोलते ही समाचार नही बल्कि चटखारे मसाले सुनने को मिलता हैं, भारतीय मनुष्य के जीवन में समाचार का बहुत महत्व होता हैं। समाचार के बिना हम भारतीयों के पेट में गैस बनने लगता हैं, सूत्रों से कई लोग संडास में समाचार लेकर बैठ जाते हैं चार जीवन क्रिया का अहम भूमिका निभा रहा है।
सब नजरिये के बात है, समाचार बनना चाहिये खबर बिकना चाहिये, सवाल न्यूज चैनलों का आपसी दौड़ जिसमें हर कोई भाग रहा है।
अभी कुछ दिन पहले न्यूज चैनल वालों ने महान अभिनेता को मृत्यु घोषित कर दिया, फिर सूत्रों के हवाले बताते दांत चियारते ढंग से माफ़ी भी ना मांगा, पत्रकार मनसुख ने बताया कि ” गुरु चैनल वाले बड़े ढीठ किस्म के होते हैं। इनको किसी भी स्तर पर सिर्फ मसाला चाहिये सारी गलती इनकी नहीं देखने वाले जनता का है।
अभी tv पर ईरान युध्द में बड़े पैमाने पर मिसाइल हिंदुस्तान के सरजमीं पर गिर रहा हैं। घर पर नौकरानी बोल रही थी “साहब जी ये रिपोर्टर युद्ध के बीच कितना खतरनाक रिपोर्टिग कर रहा अभी एक फटा नहीं है।” चुपचाप झाड़ू मार ज्यादा वैश्विक मामले में नाक ना घुसेड़
सब बेचारी जनता पर थोपना अच्छा नहीं है, जनता युगों से कई निक्कमे सरकार को ढो रही हैं। फिलहाल मामला न्यूज चैनल का चल रहा हैं, शाम होते ही बहस का पैनल ऐसा शोर मचाते पड़ोसी घबराता हुआ दौड़ा चला आता हैं, बोलता ” प्रोफेसर साहब मुझे लगा आपके घर झगड़ा हो रहा हैं, भाभीजी आप पर चीख रही हैं।
प्रोफेसर साहब गुस्से में चाय नास्ता के लिये भाभी जी को बोल रहे हैं, मन ही मन में गाली देते” जब देखो घर में घुसने की कोशिश जारी रहती हैं। हर मोहल्ले,गांव में बड़े पैमाने पर देशी न्यूज एंकर होते हैं, जो बड़े ही चाव से चटखारे लेकर छोटी सी बात को मलाई मारकर बड़ी खबर बना देते हैं। ऐसे लोग हमेशा कौतुहल के केंद्र रहते हैं, बुझे चिंगारी से आग लगाने में माहिर होते हैं। बिना डिग्री के इधर की खबर उधर उढ़ाने में माहिर होते हैं, इस कला के लिये राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान होनी चाहिये सरकार के रवैये और भष्ट्राचार से नाराज दुःखी जनता का समा बांधने में न्यूज एंकर और मोहल्ले वाले चाचीयो का बड़ा योगदान रहा हैं।
— अभिषेक राज शर्मा
