तुम कहाँ चले गए…
तुम कहाँ चले गए… काश,तुम मन की बातें कह पाते।कुछ कहना चाहते थे,पर तुम्हारे अस्पष्ट शब्दों कोमैं समझ न पाती
Read Moreतुम कहाँ चले गए… काश,तुम मन की बातें कह पाते।कुछ कहना चाहते थे,पर तुम्हारे अस्पष्ट शब्दों कोमैं समझ न पाती
Read Moreचमकती स्क्रीन के सम्मोहन में,हर पल खुद को खोता है,तकनीक की अदृश्य डोरियों से,अब इंसान संचालित होता है। जेब में
Read Moreअस्थि-मांस का पुतला,पाषाण हो गया है,संचित स्मृतियों के जाल में,इंसान कैद हो गया है! हर पत्थर टीस पुरानी,इक ‘अधूरी चाह’
Read Moreबीज रोपा था अटल ने,‘कमल’ खिला नैतिक बल से।देदीप्यमान है उनका परचम,चहुँदिशा, सकल नभ-थल में।। अंतस् में कविता बहती थी,भावों
Read Moreपरख लिए दुनिया के रंग,यहाँ किरणें भी काँच की किरचें हैं,स्वार्थ के शूल चुभाते साये,मित्रता की ओट में छिपते हैं।
Read Moreइंटरव्यू चल रहा था। पाँच सीनियर्स के पैनल में वो भी बैठा था — वही, जिसने कभी मेरी कमज़ोरी का
Read More“ऐसी हीरोइन… जिसे दूसरे कॉलेज का हीरो उड़ाकर ले गया।” , रिया ने जानबूझकर ताना मारते हुए विपुल की ओर
Read Moreइधर सुमि और विपुल अपने अतीत और वर्तमान की उलझनों को सुलझा रहे थे, तो दूसरी तरफ़… शाम के वक़्त
Read Moreइधर कॉलेज से घर पहुँचते ही विपुल बिस्तर पर ढह गया।लेकिन दिमाग में बार-बार वही पल घूम रहा था —जब
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