सुखद स्मृतियां लुधियाना की
कवि सम्मेलन की नामचीन हस्तियां
श्री शैल चतुर्वेदी और
श्री बशीर बद्र
शैल जी का आग्रह
वाणी वंदना के बाद मुझे पढ़ाएं
संचालक डॉक्टर सतीश ने बारी-बारी से सबसे पूछा&
उनके बाद कौन पढ़ेगा?
एक-एक करके सभी लोगों ने मना कर दिया
आखिरी में मेरी बारी आई मैंने स्वीकार किया
बड़े भाई शांत जी ने कहा आत्महत्या करनी है क्या?
मैंने जवाब दिया- मंच पर बताऊंगा!
शैल जी ने मंच को बहुत ऊंचा उठा दिया था
पहली रचना
मेरे साथ एक लड़की थी रेखा उसने मुझे देखा और चल गई
और
आखिरी रचना
नाच रहे सरदार भांगड़ा होली में
फिर मेरा नंबर आया
मैंने प्रसंग बताया कि
देवासुर संग्राम में वृतासुर नामक दैत्य को मारने के लिए दधीच ऋषि की अस्थियाँ दान में
बलि स्वरूप दी गई थी आत्महत्या नहीं की गई
जिससे राक्षस मारा गया
ऋषि ने स्वेचक्षा से बलि दी थी
मैंने यह कहकर दो पंक्तियां पढ़ दी
हम दधीचि के वंशज अपनी बलि हमको स्वीकार
यदि संभव है इससे कुछं मानवता का उद्धार
शैल जी ने उठकर माला डालकर सम्मान किया और कहा कि शाम को जालंधर में भी मेरे साथ पढ़ना है
वह सुंदर स्मृतियां अब भी सजीव है
— डॉक्टर इंजीनियर मनोज श्रीवास्तव
