गजल
तेज है धूप भी और है लंबा सफरपथरीली राहों का भी असर आ गया पता ही नहीं मंजिल अपनी कहांउजड़ा
Read Moreमानवता रोई थी जार जार जब हुआ देश का बंटवाराहिंसा भी चरम पर थी अपने भाई को बनाया था चारा
Read Moreमिडिल क्लास तो मिडिल क्लास हैभरा हुआ आधा गिलास है अच्छे दिन आने वाले हैं सदालगाए वह तो यह ही
Read Moreमंझधार में घिरी नौका को तूफाँ से बचाने वाला हूंमेरा छोटा सा परिचय है मैं अग्नि कुंड की ज्वाला हूं
Read Moreकवि सम्मेलन की नामचीन हस्तियांश्री शैल चतुर्वेदी औरश्री बशीर बद्रशैल जी का आग्रहवाणी वंदना के बाद मुझे पढ़ाएंसंचालक डॉक्टर सतीश
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