मुहब्बत का रंग : रक्षाबंधन
मैं उसकी जादूगरी में गिरफ़्तार होता चला गया , उस से मेरी मुलाक़ात कोई ज़्यादा पुरानी न थी , और
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Read Moreरक्षाबंधन की सुबह थी। मुंबई के एक छोटे से अपार्टमेंट में रहने वाली श्रद्धा की आँखें अलार्म के तीसरी बार
Read Moreअहमदाबाद की बारिश जैसे शहर को नहीं, रागिनी के भीतर के सूनेपन को भिगो रही थी। खिड़की के बाहर रुक-रुक
Read Moreकभी-कभी ज़िंदगी के सबसे बड़े सबक किसी स्कूल या किताब से नहीं, बल्कि एक साधारण से घर में, एक सादी-सी
Read More“हैलो !” एक अनजान नंबर से महिला की आवाज आई।दीपक थोड़ी -सी घबराहट से जवाब देते हुए कहा,”जी…नमस्ते।”“मैं सुधा बोल
Read Moreबाबा नौकरी में थे। जब तक कमाते रहे, बेटा-बहू बड़ा अच्छा व्यवहार करते थे, पूछ-पूछकर खाना देते, हाल-चाल पूछते, सब
Read Moreदिया और रिया दोनों सगी बहनें, दोनों हमेशा पूरे घर को खुशी से गुजायान रखते , लेकिन कहा जाता है
Read Moreतेरहवीं की भीड़ अब छँट चुकी थी। जो रिश्तेदार आए थे, वे अब लौट चुके थे। दीवारों पर अब भी
Read Moreकामकाजी स्त्रियाँ सिर्फ ऑफिस से नहीं लौटतीं, बल्कि हर रोज़ एक भूमिका से दूसरी में प्रवेश करती हैं—कर्मचारी से माँ,
Read Moreसावन की रिमझिम बारिश, खेतों की हरियाली, पीपल के पेड़ पर पड़े झूले, और औरतों के गीतों की गूंज —
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