ग़ज़ल
आदमी का स्वभाव होता है
सोचता है तनाव होता है
दर्द को भी बुलन्दतर करता
जो गहनतर लगाव होता है
नर्म दिल पर कठोर दुनिया का
चारतरफ़ा दबाव होता है
प्यार दिल में भले रखे हों हम
तुम न दो तो अभाव होता है
नाम, पद, धन सदैव सेवा में
रूप का वो प्रभाव होता है
मैं नदी से उधार लेता हूँ
जब न मुझमें बहाव होता है
कम नहीं है बबूल की छाया
गर तपन से बचाव होता है
— केशव शरण
