गीतिका/ग़ज़ल केशव शरण 08/02/202608/02/2026 0 Comments ग़ज़ल महरूम हुआ खाने-पीने-सोने सेअपनी महबूबा के रूठे होने से हुस्न समझ बैठा है इश्क़ सहमता हैउसको या उसकी हमदर्दी खोने Read More
गीतिका/ग़ज़ल केशव शरण 05/01/202605/01/2026 ग़ज़ल बराबर धुंध, बदरी चल रही हैअभी तक शीतलहरी चल रही है रहे कर ऐश ए सी में प्रणेताकि कोई बात Read More
गीतिका/ग़ज़ल केशव शरण 01/12/202527/11/2025 ग़ज़ल उड़ गया जिस्म आशनाई काबम दिया फोड़ बेवफ़ाई का सिर्फ़ चेहरा सियाह करती हैअब यही काम रोशनाई का गोपियों की Read More
गीतिका/ग़ज़ल केशव शरण 27/11/202527/11/2025 ग़ज़ल चोट वाला निढाल मिलता हैदूसरे को उछाल मिलता है सब बमों में ज़फ़ा-दग़ाओं केप्यार का इस्तमाल मिलता है मैं इसी Read More
गीतिका/ग़ज़ल केशव शरण 09/10/202509/10/2025 ग़ज़ल ख़ुदाई काम से ख़ंजर अलग करकिसी तन से न कोई सर अलग कर सही वो न्याय जो क़ानून-सम्मतहमारी माँग, बुलडोजर Read More
गीतिका/ग़ज़ल केशव शरण 12/09/202512/09/2025 ग़ज़ल कह रहा बार-बार दिल लाओहुस्न लेकर कटार दिल लाओ कह रहे वो यही ज़माने सेमैं करूँगा न प्यार दिल लाओ है कहाँ Read More
गीतिका/ग़ज़ल केशव शरण 14/08/202514/08/2025 ग़ज़ल फिर उठकर ताज़ादम होने की ख़ातिरजाता हूँ बिस्तर पर सोने की ख़ातिर सबके साथ नहीं हँसना है सोच लियाफँसना पड़ Read More
गीतिका/ग़ज़ल केशव शरण 10/07/202510/07/2025 ग़ज़ल टूटने पर क़हक़हे को सौ जनेएक दिल है तोड़ने को सौ जने हो गए समझा-बुझाकर बाँवरेइस हमारे बाँवरे को सौ Read More
गीतिका/ग़ज़ल केशव शरण 09/06/202509/06/2025 ग़ज़ल फिर उठकर ताज़ादम होने की ख़ातिरजाता हूँ बिस्तर पर सोने की ख़ातिर सबके साथ नहीं हँसना है सोच लियाफँसना पड़ Read More
गीतिका/ग़ज़ल केशव शरण 08/03/202508/03/2025 ग़ज़ल इश्क़ बदहाल हज़ारों का हैऔर ये वक़्त बहारों का है दिल बुझा और नज़र फीकी-सीपर चटक रंग नज़ारों का है Read More