गीतिका/ग़ज़ल केशव शरण 12/09/202612/09/2026 0 Comments ग़ज़ल मयक़दे की भी दशा अब हो चली है दूसरीहर तरफ़ के मयकशों की मंडली है दूसरी इस गली से उस Read More
गीतिका/ग़ज़ल केशव शरण 10/08/202610/08/2026 ग़ज़ल न घबरा कि हर बात का हल रहा हैपरेशानियों का समय चल रहा है भरोसा रखो कर्म करते हुए तुमलगेगा Read More
गीतिका/ग़ज़ल केशव शरण 10/07/202610/07/2026 ग़ज़ल न थी सुध, इश्क़ में बदनाम होगीभुगतती ज़िंदगी अंज़ाम होगी मुहैया जो कराई थी छली नेमयस्सर फिर न वैसी शाम Read More
गीतिका/ग़ज़ल केशव शरण 07/07/202607/07/2026 ग़ज़ल अब कब बरस रही है हम इन्तज़ार करतेकाली घटा घिरी है हम इन्तज़ार करते इक प्यार की ख़ुशी बिन कोई Read More
गीतिका/ग़ज़ल केशव शरण 07/06/202607/06/2026 ग़ज़ल टूटने के कगार पर है येदिल रहे शाद यार पर है ये इक यही पेड़ है कि सूख रहाजबकि बगिया Read More
गीतिका/ग़ज़ल केशव शरण 07/06/202607/06/2026 ग़ज़ल आदमी का स्वभाव होता हैसोचता है तनाव होता है दर्द को भी बुलन्दतर करताजो गहनतर लगाव होता है नर्म दिल Read More
गीतिका/ग़ज़ल केशव शरण 15/05/202615/05/2026 ग़ज़ल कुछ नया देखने इधर आयापर तमाशा वही नज़र आया कुछ नहीं है सिवाय वीरानासोचता हूँ कि मैं किधर आया भेंट Read More
गीतिका/ग़ज़ल केशव शरण 08/04/202608/04/2026 ग़ज़ल पेड़ पीली पत्तियों से भर गयाक्या समझकर फूस का घर डर गया हर किसी ने किस तरह देखा मुझेछोड़ वो Read More
गीतिका/ग़ज़ल केशव शरण 13/03/202613/03/2026 ग़ज़ल ये नहीं सिम्त चार अभी कम हैमुझमें ही ये बहार अभी कम है जानती ख़ुशगवार दुनिया भीमेरा दिल ख़ुशगवार अभी Read More
गीतिका/ग़ज़ल केशव शरण 08/02/202608/02/2026 ग़ज़ल महरूम हुआ खाने-पीने-सोने सेअपनी महबूबा के रूठे होने से हुस्न समझ बैठा है इश्क़ सहमता हैउसको या उसकी हमदर्दी खोने Read More