गीतिका/ग़ज़ल केशव शरण 07/06/202607/06/2026 0 Comments ग़ज़ल टूटने के कगार पर है येदिल रहे शाद यार पर है ये इक यही पेड़ है कि सूख रहाजबकि बगिया Read More
गीतिका/ग़ज़ल केशव शरण 07/06/202607/06/2026 0 Comments ग़ज़ल आदमी का स्वभाव होता हैसोचता है तनाव होता है दर्द को भी बुलन्दतर करताजो गहनतर लगाव होता है नर्म दिल Read More
गीतिका/ग़ज़ल केशव शरण 15/05/202615/05/2026 ग़ज़ल कुछ नया देखने इधर आयापर तमाशा वही नज़र आया कुछ नहीं है सिवाय वीरानासोचता हूँ कि मैं किधर आया भेंट Read More
गीतिका/ग़ज़ल केशव शरण 08/04/202608/04/2026 ग़ज़ल पेड़ पीली पत्तियों से भर गयाक्या समझकर फूस का घर डर गया हर किसी ने किस तरह देखा मुझेछोड़ वो Read More
गीतिका/ग़ज़ल केशव शरण 13/03/202613/03/2026 ग़ज़ल ये नहीं सिम्त चार अभी कम हैमुझमें ही ये बहार अभी कम है जानती ख़ुशगवार दुनिया भीमेरा दिल ख़ुशगवार अभी Read More
गीतिका/ग़ज़ल केशव शरण 08/02/202608/02/2026 ग़ज़ल महरूम हुआ खाने-पीने-सोने सेअपनी महबूबा के रूठे होने से हुस्न समझ बैठा है इश्क़ सहमता हैउसको या उसकी हमदर्दी खोने Read More
गीतिका/ग़ज़ल केशव शरण 05/01/202605/01/2026 ग़ज़ल बराबर धुंध, बदरी चल रही हैअभी तक शीतलहरी चल रही है रहे कर ऐश ए सी में प्रणेताकि कोई बात Read More
गीतिका/ग़ज़ल केशव शरण 01/12/202527/11/2025 ग़ज़ल उड़ गया जिस्म आशनाई काबम दिया फोड़ बेवफ़ाई का सिर्फ़ चेहरा सियाह करती हैअब यही काम रोशनाई का गोपियों की Read More
गीतिका/ग़ज़ल केशव शरण 27/11/202527/11/2025 ग़ज़ल चोट वाला निढाल मिलता हैदूसरे को उछाल मिलता है सब बमों में ज़फ़ा-दग़ाओं केप्यार का इस्तमाल मिलता है मैं इसी Read More
गीतिका/ग़ज़ल केशव शरण 09/10/202509/10/2025 ग़ज़ल ख़ुदाई काम से ख़ंजर अलग करकिसी तन से न कोई सर अलग कर सही वो न्याय जो क़ानून-सम्मतहमारी माँग, बुलडोजर Read More