कुण्डली/छंद

रासावलय छंद

धरती पर चंदा, बरसाता है प्यार।

तारों से सजता, जगमग ये संसार।

दमक रहें जुगनू, अँधियारा मिटाते–

मनभावन छमछम, पायल की झंकार।।

नील गगन आभा, तारों सँग चाँदनी।

पिया मिलन आशा, हर्षित प्रिय रागिनी।

प्रेम पुष्प खिलतें, साजन जब पुकारे–

सुरभित हिय बगियां, रूप खिला मालिनी।।

घोर घटा छाई, मेघ शोर मचाएं।

चमचमती बिजली, चमकारा दिखाएं।

मेह भरें गागर, बरसाते झमाझम–

बूँदों की सरगम, गीत मधुर सुनाएं।।

हरियाली मखमल, आस सुखद जगाएं। 

अलबेला मौसम, शीतल ठाँव सजाएं।

पेड़ पौध झुमते, मोर खूब नाचते–

शृंगारित कण-कण, गीत नवल रचाएं।।

*चंचल जैन

मुलुंड,मुंबई ४०००७८

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