खुली किताब
जीवन खुली किताब है, छिपा न कोई राज। अपनी अपनी राह है, अपना अपना काज।।1।। जीवन साधन साधना, ना कोरी
Read Moreजीवन खुली किताब है, छिपा न कोई राज। अपनी अपनी राह है, अपना अपना काज।।1।। जीवन साधन साधना, ना कोरी
Read Moreलोग तो कुछ भी कहेंगे- हमको आगे बढ़नाकिसी फिल्म के आनंद बक्शी जी के गीत की कुछ पंक्तियाँ याद आ
Read Moreकेवल करें क्यों आराधना?आओ मिल हम करें साधना।। आराधना में हमें, मिले मंत्र हैं।साधना में, सफलता का तंत्र है।विकास पथ
Read Moreकरते केवल कर्म हैं, नहीं चाहिए ताज। कल की चिंता ना करें, जीते हैं बस आज।। जीवन खुली किताब है,
Read Moreभारत में स्वामी विवेकानंद सर्व स्वीकृत व समादृत देशभक्त संन्यासी हैं। उनका काल भले ही बीसवीं शताब्दी रहा हो, उनका
Read Moreस्वतंत्र रहें, स्वछंद रहें हम।खुशी मिले या मिलते गम।अपना पथ, अपना निर्णय,परिणामों को स्वीकारें हम।नहीं किसी के अनुगामी हैं।लक्ष्य, कर्म
Read Moreज्ञान नहीं जो पोथी में।ज्ञान वही जो ज्योति में।स्मृति नहीं जो वीथि में।स्मृति वही जो रीति में। ज्ञान के नाम
Read Moreनहीं जानते, प्रेम क्या होता?पाता है नर, जो है वह बोता।पाने की, हर चाह मिट गई,राष्ट्रप्रेमी लगाए, ज्ञान में गोता।
Read Moreजब जागे हैं, तभी सबेरा। जगना अब जीवन के लिए। पढ़ना-लिखना हुआ बहुत, लिखना अब जीवन के लिए। धर्म कर्म
Read Moreकर्महीन के पास हैं, चिंता और अवसाद। कर्मयोग के साथ हैं, फर्स अर्श की खाद।। कर्ता को ना चाह है,
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