कहानी – मुर्दे की मुस्कान
रात भर आसमान चीखते- चीखते सो चुका था। धरती पर फैले रूधिर रक्त ने उसका रंग बदल दिया था। सूरज
Read Moreरात भर आसमान चीखते- चीखते सो चुका था। धरती पर फैले रूधिर रक्त ने उसका रंग बदल दिया था। सूरज
Read Moreबाप जब भी दारू पीकर घर आता, मुझसे एक ही बात कहता ” बेटा, मैं तुम्हारा दिया नहीं उडाता हूं
Read Moreबहुत साल हो गया गुरु जी को हमने याद नहीं किया। और गुरु जी को भी हम कहां याद रहे
Read More“मैनवा” यही उसका बपौती नाम था। नाम के पीछे छुपे कारनामों का पता आपको खुद ब खुद लग जायेगा। पैंतालीस
Read Moreचुटकी भर सिन्दूर की कल्पना मात्र से कभी- कभी किसी की विरान जिन्दगी में किस तरह खुशियों के रंग भर
Read Moreसुबह का आसमान साफ हो चुका था । तिलक महतो घुमते हुए बांध की ओर चले गए थे । बांध
Read Moreवह तीनों टाइम नशे में धूत रहता था। कभी कभी बेहद नशे में उसे देखा जाता। वह चलने की हालत
Read Moreउस भिखारी से यह मेरी पहली मुलाकात नहीं थी, इसके पहले भी हम दो बार मिल चुके थे। अपने ही
Read Moreचार दिनों से मैं भारत दूर संचार निगम लिमिटेड के आफिस का चक्कर लगा लगा कर थक चुका था। आज
Read Moreहादसा जब हुआ, मैं अठारह की थी और मैट्रिक की परीक्षा की तैयारी में लगी हुई थी। ” अच्छे नम्बर,
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