विह्स्की विला – भाग 8 (अंतिम भाग)
इंस्पेक्टर की बात से मुझे बेहद राहत मिली थी पर मुझे उसने जो बार – बार लौंडा कहा था वो पसंद नहीं आया था। मै उसकी कही इस आपत्तिजनक बात का विरोध दर्ज़ करने के लिए मुँह खोलना ही चाहता था कि उसका मुँह खुला ‘जब तक तसद्दुक हुसैन गिरफ्तार नहीं हो जाता और उसके विरुद्ध सारे सबूत इकट्ठे नहीं हो जाते तुम दोनों कानपुर से बाहर नहीं जा सकते।’
इन्स्पेक्टर की कही इस बात से मेरे मुँह से निकलने वाले शब्द मेरे गले में ही दम तोड़ गए।
गाड़ी में बैठ के घर जाते हुए ज्वाइस ने मुझसे पूछा ‘गालव तुमने वही चाकू इस्तेमाल किया न जिसे पिछली बार घर आने पे तसद्दुक हुसैन ने इस्तेमाल किया था ?’
‘जी हुजूर।’
‘दस्ताने प्रॉपर थे न आपके हाथो में ?’
‘जी सरकार।’
‘विहस्की विला में आने जाने की कोई फुटेज तो नहीं होगी न CCTV कैमरे में।’
‘न मेरी जान।’ मैने मुस्कराके कहा और फिर कुछ याद करके पूछा वो मुंह ढके हुए शख्स कौन था जो तुमसे मिलने घर में आया था।’
‘घर का भूतपूर्व मालिक।’
‘मतलब तसादुक हुसैन ?’
‘हाँ डियर ?’
‘क्या बात की उसने तुमसे ?’
‘बोला रहा तह जब वो विहस्की विला गया तो समरीन की वहां उसे लाश मिली और पुलिस को उसपे शक है।’
‘तुमसे क्या चाहता था ?’
‘मैं उसके फेवर में गवाही दूँ।’
‘कैसी गवाही ?’
‘यही कि वो समरीन मतलब अपनी बीवी का कत्ल नहीं कर सकता।’
‘तुमने क्या जवाब दिया ?’
‘मैने कहा ये पुलिस और अदालत बताएगी किसने मेरी मॉम का कत्ल किया और वो जो भी होगा उसे मै सजा दिलाने के लिए जान लड़ा दूंगी।’
‘फिर ?’
‘फिर क्या कहीं छुपने के लिए वहां से लम्बे पाँव निकल गया।
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वक़्त की चाल ने ज्वाइस के दिल से उसकी पिता की मौत का दर्द काफी कम दिया। उसके पिता की मौत की जिम्मेदार और उसके प्रेमी को छीनने की कोशिश करने वाली उसकी मॉम समरीन अब इस दुनिया में नहीं थी और उसकी हत्या के जुर्म में उसके मॉम का शौहर सलांखों के पीछे था। इतनी वीभत्स ढंग से अपनी बीवी की हत्या करने के जुर्म में अदालत ने तसद्दुक हुसैन को सजाये मौत की सजा दी थी।
जिस घर की नेमप्लेट पर कभी TH मज़िल लिखा रहता था वहां अब लववाइस लिखा हुआ था।
ये नाम ज्वाइस ने ही लिखवाया था। मेरे नाम गालव का लव और अपने नाम ज्वाइस से वाइस लेकर।
जहाँ एक तरफ अदालत ने तसद्दुक हुसैन को सजाये मौत दी थी वही उसी अदालत ने हमें पति – पत्नी बनने का तोहफा दिया था।
उस शाम जो एक बेहद खुशनुमा थी मैं तैयार होकर अपनी बीवी का ड्राइंगरूम में इंतज़ार कर रहा था जो बगल के कमरे में तैयार हो रही थी।
ज्वाइस का बहुत मन था वो एक बार विहस्की विला जाए और आज हमने वहां जाने का प्लान किया था।
ज्वाइस जब तैयार होकर मेरे रूबरू आयी तो उसकी यक्ता खूबसूरती ने मुझे सम्मोहित कर दिया था। ना जाने कितनी देर मै अपनी बीवी की खूबसूरती में खोया रहा, न जाने कितनी देर खोया रहता अगर सईदा ने आकर उस खुशनुमा मंजर को वो खबर देकर पतझड़ में न बदल दिया होता।
इतने दिनों बाद यूँ इन्स्पेक्टर नवेद का यूँ घर पे आना सावन में पतझड़ के आने जैसा ही था।
‘कहीं घूमने जा रहे थे आप दोनों ?’
हमें यूँ सजे – धजे देख कर इन्स्पेक्टर नवेद ने पूछा।
उसे खुर्राट इन्स्पेक्टर की बेवक्त आमद और सवालों की शुरुआत से मैं थोड़ा घबरा गया था।
ज्वाइस ने इंस्पेकटर को पहले बैठने जको कहा फिर सईदा को बुलाके चाय लाने की हिदायत दी।
‘बस आफिसर थोड़ा बाहर घूमने जा रहे थे।’ इन्स्पेक्टर की कही बात का जवाब मैने दिया था।
‘कहाँ ?’
‘विहस्की विला।’ अबकी बार ज्वाइस बोली।
‘ओह इस लौंडे मतलब अपने पति के साथ।’
लौंडा कहने से मुझे पुराना दंश याद आ गया इसलिए आवाज़ में तंज़ लाते हुए मैने कहा ‘क्या पति के साथ पत्नी का घूमने जाना गुनाह है।
‘नहीं पति पत्नी का बाहर घूमने जाना कोई गुनाह नहीं पर किसी का क़त्ल कर देना गुनाह है।’
सईदा चाय ले आयी थी ज्वाइस ने इन्स्पेक्टर नवेद को चाय देते हुए पूछा ‘किसका क़त्ल ?’
‘आपकी मॉम का।’
‘हम्म और उनके क़त्ल का गुनहगार जेल में है।’
‘वो अपने कर्मो के गुनाह की वजह से जेल में न कि आपकी मॉम के क़त्ल के गुनाह में।’
‘मतलब ?’ ज्वाइस ने इंस्पेकटर की बात को सुनके हौले से पूछा।
‘मतलब ये मैं ये जान गया हूँ मिसेज समरीन का कातिल कौन है।’
‘तसद्दुक हुसैन और अदालत उसे सजा दे चुकी है।’ इन्स्पेक्टर की बात सुनके मैने फ़ौरन रिप्लाई दिया था। पर उस इंस्पेक्टर ने मेरी बात पर कोई तवज्जो न देकर ज्वाइस को देखते हुए बोला ‘मैं जो पूछने जा रहा हूँ वो सिर्फ अपनी जानकारी दुरुस्त करने के लिए है उससे न अदालत का फैसला बदलेगा और न मैं ऐसी कोई कोशिश करूँगा क्योंकि मैं जानता हूँ बेहद बुरे हालातों से गुजरने वाला कोई शख्स जुल्म करने वालो के फंदे से निकलने के लिए कोई और रास्ता न पाकर ऐसा रास्ता अख्तियार करता है।
पूछिए।’ ज्वाइस ने पहली बार चाय का घूंट लिया था जबकि इसंपेक्टर अपनी चाय खत्म कर चूका था और मैने अब तक चाय के कप को छुआ तक नहीं था।
‘क्या मैं इस वक जिससे रूबरू हूँ वो वही वजूद है जिसके मासूम चेहरे के पीछे साजिश रचने की क़ाबलियत वाला दिमाग है।’
ज्वाइस ने एक पल सोचा और फिर स्थिर आवाज में बोली ‘हाँ।’
‘और वो हाथ जिन्होंने साजिश को अंजाम तक पहुँचाया।’ नवेद खान के सवाल से एक सर्द लहर मेरे भीतर उठी थी जो तब और गहरी हो गई जब ज्वाइस ने मेरी और देखते हुए कहा ‘हाथ वही हैं जिन्हे वजूद से अलग करने की कोशिश की गई।’
इन्स्पेक्टर ने एक ठंडी सांस लेकर मेरी और देखा और फिर बोला ‘गालव संभाल के ले जाना अपनी बीवी को विह्स्की विला में।’
‘जी।’ मेरे गले ने बमुशिकल इतना बोलने में मेरा साथ दिया था।
इसंपेक्टर नवेद खड़े होकर ज्वाइस के सर पर हाथ रखते हुए बोला ‘लववाइस: द स्टोरी इनसाइड आफ विहस्की विला का सच हमेशा मेरे भीतर रहेगा उसे बाहर आने की इजाजत नहीं होगी।’
ज्वाइस ने आँखें झुकाकर इंस्पेकटर नवेद का आभार प्रकट किया और मैने राहत की सांस ली।
इन्स्पेक्टर के जाने के बाद मैं कुछ देर हालात और समय की रवानी पर हैरान खड़ा रहा था। और मेरी हैरानी तब टूटी जब ज्वाइस ने मेरा हाथ पकड़ के कहा ‘यार गालव जब इन्स्पेक्टर ने लववाइस की स्टोरी को विह्स्की विला की इनसाइड स्टोरी मान लिया है तो लाज़िमी है हमें वहां जाने में देर नहीं करनी चाहिए।’
‘जी हुजरू जैसे आपका हुक्म।’ जब मैं कहकर हंसा तो ज्वाइस में मेरे साथ हंस पड़ी थी।
— सुधीर मौर्य
