ताटंक छंद – गीत नहीं आते अधरों पर
गीत नहीं आते अधरों परआँखें जब दो रोती हैं।पेट भरा रहता है जिनका,बस उनसे यह होती हैं।खोज़ रहे दो रोटी
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Read Moreबरगद की घनी छाया है पिताछाँव में उसके भूलता हर दर्द। पिता करता नहीं दिखावा कोईआँसू छिपाता अन्तर में अपने।तोड़ता
Read More1-कहते ज्ञानी लोग हैं, अजब गजब संसार।दुनिया लोभी लाभ की, यही दिखे व्यापार।यही दिखे व्यापार, मोह के सारे मारे।मन्दिर जाते
Read Moreसूरज अपने एक दोस्त की शादी में कानपुर जा रहा था। सूरज का बचपन वहीं गुजरा था अतः वहाँ के
Read Moreफिर आज झूम यह पर्व सभी यहाँ मनाते। कितना लगे उन्हें पावन आज वह बताते।।1।। सबके लिए समर्पित परहित जिए
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