Author: *डॉ. अ. कीर्तिवर्द्धन

कविता

ग़ाँव – एक दर्पण

गाँवयानि गरीबीफटेहाल जिन्दगीऔरकुछ गन्दगी। गाँवयानि सन्तुष्टिमानवता -निश्छलताप्रकृति से नजदीकीछल रहित जिन्दगी। गाँवयानि परम्पराओं का निर्वाहईश्वर में आस्थाशिक्षा का अभावसंस्कारों का

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