शेर और बकरी
पीते जो एक घाट पर, शेर और बकरी पानी,बकरी खा लेती घास, शेर की जान थी जानी।भूखा रहकर कैसे रहता,
Read Moreपीते जो एक घाट पर, शेर और बकरी पानी,बकरी खा लेती घास, शेर की जान थी जानी।भूखा रहकर कैसे रहता,
Read Moreजिन गलियों में बचपन बीता, उनकी बात निराली है,लुकाछिपी आइस पाइस, खेलों की बात निराली है।सारा गाँव था एक हवेली,
Read Moreसजल नेत्र क्यों ग़ज़ल आज खड़ी हुयी है,उर्दू पर इतराती, हिन्दी पर झिझक रही है?रंग रूप इश्क़ कसीदे, महफ़िल रहने
Read Moreवह करता है अक्सरदेह से देह तक की यात्राबिना उसकी मर्जी केऔर शायद बलात्कार भीउसकी आत्मा का,जिसे समझता है वहअपना
Read Moreभुला दिये घर बार गाँव के, शहर चले आये,तन्हा छोडा आंगन, उसमें पीपल ऊग आये।पूछ रही दीवारें, दरवाजे भी अलख
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