Author: *डॉ. अ. कीर्तिवर्द्धन

कविता

मुक्ति

मुक्तिसम्भव नहींवर्तमान सेअतीत सेऔर भविष्य से भी। बन्धनों में रहकर भीमुक्त रहनासाधना है।अच्छे वस्त्रआभूषणअथवामाला कंठीधारण कर भीउसमें लिप्त न होनामुक्ति

Read More