मुक्तक
जीवन केवल बसन्त नही है, पतझड़ का होता साया,पीत पत्र झड़ने के बाद ही, नव सृष्टि सृजन हो पाया।जिसे मिला
Read Moreनारी नर पर भारी है,फिर भी वह बेचारी है। आँसू का हथियार चलाती,सबको अपना दास बनाती,पलभर में घुटनों पर लाती,फिर
Read Moreबच्चों की हँसी मासूम लगती है,दुष्टों की हँसी नासूर बनती है। माँ की हँसी में प्यार छलकता,हसीनाओं की हँसी मार
Read Moreगाजियाबाद से पधारी जानी मानी लेखिका एवं साहित्यकार श्रीमती लेखा वर्मा के संपादन में विभिन्न लेखकों द्वारा रचित कहानी संग्रह
Read Moreराह निहारूँ मैं साजन की, अबकी सावन मेंइत उत बरसो बदरा जाकर, अबकी सावन में। बहुत दिनों के बाद सजन,
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