धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

वर्णाश्रम एवं चातुर्वर्ण्य

वैदिक परम्परा में वर्णाश्रम धर्म एवं चार वर्णों को आधार माना जाता है । परन्तु वर्तमान में इसका जो रूप हमें दिखायी देता है, वह शास्त्रों की परिभाषा के विपरीत है । वर्णाश्रम व्यवस्था एवं चातुर्वर्ण्य व्यवस्था सदैव ही समाज में रही है और रहेगी । अगर हम कहें कि वैश्‍विक किरणें ( cosmic rays) […]

मुक्तक/दोहा

मुक्तक

जीने की ख़ुशी, न मरने का गम है, मानव मिला तन, यही क्या कम है। किया क्या है हमने, यह तन पाकर, जीवन मरण का, यह कैसा भ्रम है? डरते नहीं हम मरने से, लेकिन, जीने का मक़सद, हमारा कर्म है। संस्कार संस्कृति, हमारी विरासत, पुरातन होने का, हमको न गम है। मर्यादा में रहना, […]

स्वास्थ्य

श्वास विज्ञान

दुनिया में सबसे अनोखा विज्ञान    “श्वास विज्ञान“ श्वास विज्ञान  क्या है?— मनुष्य के शरीर में वायु की गति, अंग-अंग में वायु परीक्षण एवं प्रभाव का अन्वेषण ही श्वास विज्ञान में आता है। इसकी खोज हमारे ऋषि मुनियों ने दीर्घकालिक अनुभवों के बाद की थी।आश्चर्यजनक तथ्य यह है क़ि आज भी भारत के अलावा दुनिया […]

कविता

बरसात का आनन्द

बरसात का आनन्द अब, फिर से लिया जायेगा, बचपन में भीगा करते थे, पचपन में देखा जायेगा। लगती नहीं वर्षा की झड़ी, कैसे बतायें बच्चों को, थोड़ी सी बारिश गर हुई, ज़्यादा समझा जायेगा। हैं कहाँ सर्दी की ठिठुरन, अकड़ जाती थी अंगुलियाँ, लू के थपेड़े भी कहाँ बचे, गर्मी में देखा जायेगा। सुविधाएँ बहुत […]

कविता

कविता

बीती रात हुआ सवेरा, आँखें खोलो, देर सुबह तक सोने वालों, कुछ तो बोलो। बच्चे भी तैयार होकर, स्कूल जा चुके, दादी दादा पूजा कर, मन्दिर से आ चुके। चाय पी कर, कुल्ला मंजन करने वालो, उठ कर चाय पी लो, अब आँखें खोलो। उर्जा का स्रोत, सुबह का सूरज होता, चन्दा भी शीतलता, रातों […]

मुक्तक/दोहा

सनातन

आओ हम अपनी ढपली, अलग-अलग बजाते हैं, हिन्दू से ब्राह्मण बनिये, दलित अलग हो जाते हैं। ठाकुर जाट गुर्जर कुम्हार, गडरियों को भी बाँटों, अगडे पिछड़े स्वर्ण बोद्ध जैन, सब अलग हो जाते हैं। जाने कितने फिरके मुस्लिम, पर मुस्लिम कहलाते हैं, ईसा में भी अलग-अलग, सब ईसाई ही कहलाते हैं। सब धर्मों के अनुयायी, […]

मुक्तक/दोहा

मुक्तक

आसमां की चाहतें लेकर चला था, चाँद मुट्ठी में होगा सोचकर चला था। क्या मिला परवाह नहीं की मैंने कभी, बुलन्द हौसलों की उँगली पकड़ चला था। कुछ मिला तो ख़ुश हुआ कुछ तो मिला, कुछ नहीं पर मस्त हूँ नया रास्ता मिला। उम्र बढ़ना है बढ़ते अनुभवों की कहानी, ज्ञान था मगर सच का […]

मुक्तक/दोहा

मुक्तक

इतिहास की परतें खुलेंगी धीरे धीरे, सत्य से धूल की चादर हटेगी धीरे धीरे। ली है अभी अंगड़ाई हिन्दू ने थोड़ी थोड़ी, नींद से भी जागेगा सनातन धीरे धीरे। क्या-क्या लिखा इतिहास मे, किसने लिखा, हारे सिकन्दर का गौरव गान, किसने लिखा? किसने बताया भारत को, अनपढ़ गँवारों का देश, भूखा नंगा पिछड़ा था भारत, […]

सामाजिक

विकलांगता

सन 1981 से प्रतिवर्ष 3 दिसंबर को अन्तर्राष्ट्रीय विकलांग दिवस मनाया जाता है। अगर कहें कि इस दिन को “विकलांगता उत्सव“ कहा जाए तो निश्चित ही अनेक लोगों को इस पर आपत्ति होगी, मगर यही सच है। ऐसा सच जो विकलांगों की बैशाखियों के सहारे धीरे-धीरे चलकर अधिकारियों के लिए उत्सव बन जाता है। विकलांग […]

मुक्तक/दोहा

मुक्तक

जीवन क्या और मौत क्या है, कहाँ है धाम इनका, मरुधरा से हिमशिखर तक, कहाँ है मुक़ाम  इनका? भटक रहें हैं ज्ञानी ध्यानी, इस सत्य की तलाश में, कैसे मिले- क़िससे मिले, रहस्य का समाधान इनका? आत्मा अजर अमर, फिर दिखती क्यों नहीं, मृत्यु को सत्य बताते, बात करती क्यों नहीं? मर कर पड़ा जो […]