शिक्षा एवं व्यवसाय

शिक्षक : केवल पढ़ाने वाला नहीं; भविष्य गढ़ने वाला शिल्पकार है

शिक्षक सिर्फ किताबी ज्ञान न देकर अपने छात्रों को जीवन जीने की कला को सीखता है। उनके चरित्र का निर्माण करता है। शिक्षक खुद तपकर और जलकर अपने शिष्यों की जिंदगी को रोशन करता है। शिष्यों की प्रगति को देखकर वह खुश होता है।छात्रों को वह अपनी दौलत के समान समझता हैं। अच्छा शिक्षक अपने शिष्यों को सही गलत में भेद करने और सही निर्णय की समझ पैदा करता है। छात्रों में हौसलों की उड़ान से नवजीवन की रोशनी भरने का काम करता हैं; एक सच्चा शिक्षक। 

अंधकार रूपी आकाश में वह ज्ञान रूपी दीप जलाता है। सच्चा मार्ग बतलाकर सच्ची रहा बताता है शिक्षक। अपने आदर्शों और संस्कारों से हमें एक अच्छा इंसान बनाता है शिक्षक। 

एक अच्छा शिक्षक केवल किताब का पाठ नहीं पढ़ाता  है बल्कि वह जीवन को पढ़ना- लिखना सीखाता है।

हमारे देश की महान् परंपरा रही है कि शिक्षक का स्थान सदा सर्वोपरि रहा है। हमारे यहां शिक्षक से गुरु का स्थान जिन्होंने पाया है उन्होंने निस्वार्थ भाव से दूसरों का भविष्य संवारा है।

हमारे यहां गुरु को केवल ज्ञान देने वाला व्यक्ति ही नहीं माना गया है बल्कि उन्हें जीवन का मार्गदर्शन,संस्कारों का संवाहक और भविष्य का निर्माता माना गया है। एक महान् व्यक्ति के पीछे भी एक शिक्षक का हाथ होता है। वह अपने विचारों से वैचारिक क्रांति करता है। वह समाज देश और दुनिया बदलने की ताकत रखता है।

 इसी वजह से भारत में 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिन देश के महान् शिक्षक, दार्शनिक और पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती का स्मरण करते हुए शिक्षकों के प्रति कृतज्ञता करने का शुभ अवसर है।

आज के तकनीकी और मशीनी युग में विद्यार्थियों की दशा और दिशा बदलने का काम यदि सही मायने में कोई करता है तो इसका सच्चा हकदार है शिक्षक समाज ही हैं। 

शिक्षक हमें सिर्फ अच्छे अंक लाकर एक बेहतर परीक्षा परिणाम तक सिद्ध नहीं करता है बल्कि वह हमें एक अच्छा इंसान बनाकर एक जिम्मेदार देश का नागरिक बनाना चाहता हैं।जब तक इंसान एक अच्छा इंसान नहीं बनता तब तक शिक्षक का सपना समाज और राष्ट्र का अधूरा रहता है। अतः शिक्षक अपने शिष्यों को नैतिक मूल्यों और कर्तव्यों का पाठ पढ़ाता है।उन्हें संस्कारवान बनाता है। अपने विद्यार्थियों को सोचने समझने का एक बड़ा आयाम और एक बड़ा विवेकशील नजरिया देता है। वह अपने विद्यार्थियों को सत्य,अहिंसा और त्याग रूपी देशभक्ति का पाठ पढ़ाता है।

देश के हर क्षेत्र के विकास के लिए तथा समृद्ध राष्ट्र के लिए शिक्षक का स्थान महत्वपूर्ण ही नहीं बल्कि अति आवश्यक हो जाता है। शिक्षक की गरिमा और शिक्षक का स्थान सम्माननीय हो जाता है। आज देश में शिक्षकों की सुविधा और शिक्षा के बजट में सरकार को बढ़ोतरी करने की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।

           ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए आज भौतिक संसाधनों के अभाव में भी शिक्षक अपने प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिए परिवार के सदस्यों की भांति जोड़कर हौसलों के पंख लगाते हैं और अभाव में फूल खिलाने का काम करते हैं। विद्यार्थी को जीवन जीने की प्रेरणा से सुगम मार्ग दिखाता है एक शिक्षक और हर परेशानी से लड़ना ही नहीं बल्कि हंसकर जीना सब कुछ सीखने का व्यावहारिक ज्ञान देता है; वह होता है शिक्षक। 

आज के दौर में और स्वार्थ भरी जिंदगी में यह माना जाने लगा है कि शिक्षा का अर्थ केवल सरकारी नौकरी प्राप्त करना है और रोजगार तथा प्रतियोगिता परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करना ही एकमात्र उद्देश्य समझा जा रहा है और शिक्षा का व्यवसायीकरण होने लगा है किंतु सच में शिक्षा का क्षेत्र अत्यंत व्यापक है। शिक्षक का उद्देश्य मानव को एक अच्छा,आदर्श इंसान बनाने से है। विद्यार्थी को विवेकवान तथा संवेदनशील, सही-गलत का निर्णय लेने वाला; न्यायशील,व्यावहारिक और मानवीय गुणों से जीवन जीने वाला,कर्तव्य-पथ पर चलने वाला तथा मानवीय संस्कारों से प्रेरित होकर एक सच्चा जीवन जीने वाला जिम्मेदार नागरिक बनाने से है। 

     एक शिक्षक का उद्देश्य यह होता है कि वह अपने विद्यार्थियों को जीवन-पथ पर चलने के लिए सार्थकता प्रदान करने से है। न की मतलबी शिक्षा से स्वार्थी जीवन जीने से है। शिक्षक के द्वारा पढ़ाया गया छात्र यदि अधिकारी बन जाता है तो यह उस छात्र की व्यक्तिगत उपलब्धि कहलाएगी किंतु यदि वह छात्र अधिकारी बनकर समाज और राष्ट्र के प्रति वफादारी से और संवेदनशील एवं जिम्मेदार नागरिक के रूप में अपने कर्तव्यों का पालन कर समाज  तथा देश के नागरिकों की उत्तम सेवा करता है तो उसकी शिक्षा- दीक्षा सार्थक कहलाएगी, अन्यथा सरकारी नौकरी भी मूल्यहीन हो जाएगी। इसलिए एक शिक्षक के द्वारा मात्र पाठ्यक्रम पूरा करवाने से ज्यादा बेहतर छात्र के चरित्र का निर्माण करने का दायित्व ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है। शिक्षक के द्वारा निस्वार्थ भाव से अपने छात्रों को मार्गदर्शन देना भी मानवीय औषधि से कम नहीं है। विद्यार्थियों का मनोबल बढ़ाना और उनमें आत्मविश्वास पैदा करना ही एक बड़ी जीत के समान है। जिससे छात्र अपने जीवन काल में निराशा भरे समय में और संकट के समय में जीत का झंडा गाड़ देता है। जन्म देने वाले मां-बाप से शिक्षक भौतिक जीवन में अपने विचारों और संस्कारों से छात्रों के नवजीवन की संजीवनी प्रदान करते हैं। शिक्षक की सफलता तब सार्थक हो जाती है जब उसके द्वारा पढ़ाया गया विद्यार्थी जीवन के हर क्षेत्र में सकारात्मक रूप से बदलाव लाने में सक्षम होकर समाज तथा राष्ट्र की दशा और दिशा को बदलने का काम करता है। यही एक शिक्षक की सही सफलता का मूल्यांकन है। शिक्षक द्वारा दिया गया ज्ञान का उजाला और छात्रों के दिल दिमाग में बोया गया मानवीय गुणों से एक वट वृक्ष तैयार होता है जिससे विवेक रूपी प्रकाश और वट वृक्ष की छाया में समाज और राष्ट्र सुकून पाता है। जिस देश ने शिक्षकों का सम्मान किया है। देश से ऊपर शिक्षकों को रखा है। वह देश सबसे आगे बढ़ा है। चाहे कितनी ही विपरीत परिस्थितियों क्यों ना हो।

शिक्षक दिवस केवल शिक्षकों के लिए सिर्फ बधाई देने का दिन नहीं है बल्कि यह शिक्षा और व्यवस्था तथा व्यक्ति,समाज और राष्ट्र की मांग के अनुसार शिक्षा व्यवस्था को समय एवं परिस्थिति और आवश्यकता के अनुसार दिशा धारा प्रदान करने का है। एक नया संकल्प रूपी पर्व के समान है। आत्मनिर्भर इंसान से विकसित भारत का सपना है। एक जिम्मेदार नागरिक का मिशन है।भारत की महान् परंपरा, संस्कृति और विरासत को संजीवनी प्रदान करने का प्रयास है।आने वाले कल का एक बड़ा हल है। विश्व में भारत के समृद्ध युवाओं से एक नई पहचान बनाने का जज्बा है। शिक्षक राष्ट्र की मशाल है। देश के भविष्य को गढ़ने वाला शिल्पकार है। मैं अंत में यही कहना चाहूंगा-

*’गुरु का ज्ञान हमारे अंतर्मन मन को खोल देता है। गुरु अपने आशिषों से हमें बेहतर इंसान बनाता है।  छू लेते हैं वे मंजिलें अपनी-अपनी, जिसे गुरु का ज्ञान रूपी खजाना मिल जाता है।”*

-डॉक्टर  कान्ति लाल यादव

डॉ. कांति लाल यादव

सहायक प्रोफेसर (हिन्दी) माधव विश्वविद्यालय आबू रोड पता : मकान नंबर 12 , गली नंबर 2, माली कॉलोनी ,उदयपुर (राज.)313001 मोबाइल नंबर 8955560773

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