Author: प्रो. आरके जैन 'अरिजीत'

पर्यावरण

सूखा खेतों में है, सवाल व्यवस्था की जड़ों में

महाराष्ट्र में इस बार सूखे ने सिर्फ खेत नहीं सुखाए, व्यवस्था की तैयारी भी उजागर कर दी है। मुख्यमंत्री देवेंद्र

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राजनीति

प्रशासनिक करुणा अब ड्राई फ्रूट्स में पैक होकर आती है

काजू और बादाम अब केवल मेवे नहीं रहे; वे लोकतंत्र की नई शब्दावली बन गए हैं। नांदेड़ (महारष्ट्र) की सूखे

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सामाजिक

एक दिन सब छूट जाना है — उन्होंने पहले ही छोड़ दिया

सेवानिवृत्ति सामान्यतः वह घड़ी है, जब आदमी अपनी उपलब्धियों का हिसाब करता है और आगे के जीवन की सुविधाओं की

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स्वास्थ्य

मरीज ग्राहक नहीं, कैदी है — अस्पताल में विकल्पहीनता का सच

अस्पताल के दरवाजे तक आदमी बीमारी लेकर पहुंचता है, लेकिन लौटते समय अक्सर भारी बिल का बोझ साथ होता है।

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