डिजिटल दौर की पत्रकारिता: सुविधा बढ़ी, विश्वसनीयता की कसौटी भी
खबरों का सफर अब समाचार कक्षों से नहीं, हथेली पर जगमगाती स्क्रीन से तय हो रहा है। उँगली के एक
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Read Moreजीवन का सबसे कठिन संघर्ष अक्सर अस्पताल की चारदीवारी के भीतर लिखा जाता है, जहाँ हर साँस उम्मीद और समय
Read Moreकिसी राष्ट्र का इतिहास केवल राजसत्ताओं, आंदोलनों और युद्धों से नहीं बनता; उसे दिशा वे व्यक्तित्व देते हैं, जो अपने
Read Moreजब जंगल अपनी खामोशी खोने लगें, तो समझना चाहिए कि प्रकृति और विकास का संतुलन बिगड़ चुका है। भारत आज
Read Moreदिन का कोलाहल सत्य को दबा सकता है, पर रात का सन्नाटा उसे जगा देता है। जब सारी आवाज़ें थम
Read Moreअमरनाथ यात्रा का भारी वर्षा और लगातार भूस्खलन के कारण थम जाना महज़ प्रशासनिक विवशता नहीं, बल्कि हिमालय का वह
Read Moreसोने का भाव जितनी ऊंचाई छू रहा है, धरती उतनी ही गहराई में धंस रही है। वित्तीय बाजार इसे सुरक्षित
Read Moreप्रकृति चेतावनी देने के लिए शब्दों का सहारा नहीं लेती; वह अपने संकेत छोड़ती है—कभी प्यास से फटी धरती पर,
Read Moreकिसी भी भारतीय विवाह, पारिवारिक उत्सव या सामाजिक समारोह की सफलता का पैमाना आज भी व्यंजनों की विविधता और मेजबान
Read Moreसुप्रीम कोर्ट का हालिया प्रश्न — क्या अंग्रेज़ी को भारत की स्वदेशी भाषा माना जा सकता है?—सिर्फ न्यायालय का सवाल
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