बचपन की मिठास को कड़वे पसीने में बदलती यह निर्दयी दुनिया
किसी भी समाज का भविष्य बच्चों की आँखों में बसता है। जब उन आँखों के सपने स्कूल की चौखट तक पहुँचने
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Read Moreराजनीति में ऐसे क्षण विरले आते हैं, जब कोई वाक्य भाषण की सीमा लांघकर राष्ट्रीय विमर्श का दर्पण बन जाता है। दावों
Read Moreजब रोज़ी-रोटी कमाने निकले हाथ आग की लपटों में खो जाएं, तब हादसे सिर्फ दुर्घटनाएं नहीं, व्यवस्था की नाकामी का आईना बन
Read Moreअस्पतालों की सुरक्षा की पारंपरिक तस्वीर बदल रही है। आज स्वास्थ्य सेवाएँ इंटरनेट, डेटा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर आधारित हैं। मरीज
Read Moreइतिहास के कठिन दौर ही रिश्तों की असली परीक्षा लेते हैं। ऐसे समय में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का
Read More2030 तक मानव सभ्यता एक भयावह और आश्चर्यजनक मोड़ पर पहुंचने वाली है। वह दौर जब मस्तिष्क की अंतिम सीमाएँ
Read Moreस्वास्थ्य व्यवस्था की असली परीक्षा अस्पतालों की इमारतों से नहीं, मरीज को समय पर मिलने वाले उपचार से होती है।
Read Moreकुछ त्रासदियाँ सिर्फ जानें नहीं लेतीं, वे इंसानियत की चेतना को भी झकझोर देती हैं। दिल्ली के मालवीय नगर स्थित
Read Moreआज हमारी बैंकिंग, निवेश, सरकारी सेवाएं, सामाजिक संपर्क और व्यावसायिक गतिविधियां पासवर्डों की सुरक्षा पर निर्भर हैं। इसी कारण पासवर्ड
Read Moreभारतीय शिक्षा जगत में यह शायद ही पहले कभी देखने को मिला हो कि एक टीवी स्टूडियो में कही गई
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