Author: प्रो. आरके जैन 'अरिजीत'

शिक्षा एवं व्यवसाय

डिजिटल दौर की पत्रकारिता: सुविधा बढ़ी, विश्वसनीयता की कसौटी भी

खबरों का सफर अब समाचार कक्षों से नहीं, हथेली पर जगमगाती स्क्रीन से तय हो रहा है। उँगली के एक

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सामाजिक

एक देह का विदा होना, कई घरों में सूर्योदय बन सकता है

जीवन का सबसे कठिन संघर्ष अक्सर अस्पताल की चारदीवारी के भीतर लिखा जाता है, जहाँ हर साँस उम्मीद और समय

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शिक्षा एवं व्यवसाय

हुकुमचंद नारद : जब एक जीवन, पत्रकारिता का संविधान बन गया

किसी राष्ट्र का इतिहास केवल राजसत्ताओं, आंदोलनों और युद्धों से नहीं बनता; उसे दिशा वे व्यक्तित्व देते हैं, जो अपने

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पर्यावरण

कोयंबटूर मॉडल : जंगल, इंसान और भविष्य के बीच संतुलन की तलाश

जब जंगल अपनी खामोशी खोने लगें, तो समझना चाहिए कि प्रकृति और विकास का संतुलन बिगड़ चुका है। भारत आज

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धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

बदलते हिमालय के बीच बदलनी होगी तीर्थयात्रा की संस्कृति

अमरनाथ यात्रा का भारी वर्षा और लगातार भूस्खलन के कारण थम जाना महज़ प्रशासनिक विवशता नहीं, बल्कि हिमालय का वह

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पर्यावरण

आज का मॉनसून, कल का इतिहास नहीं — भविष्य का फैसला है

प्रकृति चेतावनी देने के लिए शब्दों का सहारा नहीं लेती; वह अपने संकेत छोड़ती है—कभी प्यास से फटी धरती पर,

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सामाजिक

भूख और बर्बादी के बीच का भारत : थाली में सिमटा हमारा नैतिक पतन

किसी भी भारतीय विवाह, पारिवारिक उत्सव या सामाजिक समारोह की सफलता का पैमाना आज भी व्यंजनों की विविधता और मेजबान

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भाषा-साहित्य

हमारी भाषाएँ मर रही हैं, हम अंग्रेज़ी में उनका श्राद्ध कर रहे हैं

सुप्रीम कोर्ट का हालिया प्रश्न — क्या अंग्रेज़ी को भारत की स्वदेशी भाषा माना जा सकता है?—सिर्फ न्यायालय का सवाल

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