हड़ताल — सुविधा मांगने का असुविधाजनक तरीका
मांग किसी की हो, कीमत अक्सर किसी और को चुकानी पड़ती है। बैंक कर्मचारियों की मांग हो तो बैंक बंद,
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Read Moreमहाराष्ट्र में इस बार सूखे ने सिर्फ खेत नहीं सुखाए, व्यवस्था की तैयारी भी उजागर कर दी है। मुख्यमंत्री देवेंद्र
Read Moreकैंसर के इलाज की हर अगली खुराक के साथ परिवार की एक उम्मीद जुड़ी होती है। ऐसे में जब निर्माता
Read Moreकभी उत्तर प्रदेश की पहचान उसके सामर्थ्य से नहीं, उसकी बदहाली से होती थी। अब उसी प्रदेश की पहचान बदलने
Read Moreभाषा केवल शब्दों की गठरी नहीं होती; वह समय की स्मृति, समाज की संवेदना और पीढ़ियों की साझा सांस होती
Read Moreकाजू और बादाम अब केवल मेवे नहीं रहे; वे लोकतंत्र की नई शब्दावली बन गए हैं। नांदेड़ (महारष्ट्र) की सूखे
Read Moreसेवानिवृत्ति सामान्यतः वह घड़ी है, जब आदमी अपनी उपलब्धियों का हिसाब करता है और आगे के जीवन की सुविधाओं की
Read Moreप्रसंगवश – 19 सितंबर : निमाड़ी दिवस भाषा तब नहीं मरती जब उसके शब्द चुक जाते हैं; वह तब सूखने
Read Moreअस्पताल के दरवाजे तक आदमी बीमारी लेकर पहुंचता है, लेकिन लौटते समय अक्सर भारी बिल का बोझ साथ होता है।
Read Moreप्रसंगवश – 17 सितंबर: नरेंद्र मोदी जी जन्मदिवस कुछ जीवन केवल समय के साथ आगे नहीं बढ़ते, वे समय की
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