Author: प्रो. आरके जैन 'अरिजीत'

सामाजिक

महंगाई की चक्की में पिसता वो अनाज, जिसकी रोटी सब खा रहे हैं

भारत की आर्थिक कहानी में एक ऐसा पात्र है जो हर अध्याय में मौजूद रहता है, लेकिन जिसकी पीड़ा अक्सर

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पर्यावरण

गर्मी में प्यास, बारिश में सैलाब : विकास के मॉडल पर बड़ा सवाल

21वीं सदी का भारत एक कड़वी विडंबना के दौर से गुजर रहा है। एक ओर देश अंतरिक्ष में नई ऊंचाइयां

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राजनीति

नया न्यायिक सवेरा – जब न्याय समय पर मिले, तो हर घाव भर जाता है

भारतीय न्याय व्यवस्था में कुछ फैसले केवल कानूनी आदेश नहीं होते, बल्कि बदलाव की नई दिशा तय करते हैं। 29

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इतिहास

खामोशी से भी ऊँची आवाज़ छोड़ जाने वाला नाम : बशीर बद्र

“उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो…” बशीर बद्र की यह पंक्ति आज स्वयं एक विदाई का सन्नाटा बनकर

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सामाजिक

न त्याग की मूर्ति, न कमाई का बोझ : बस दो इंसान, एक सफर

भारतीय विवाह व्यवस्था लंबे समय तक एक मौन धारणा पर टिकी रही—पुरुष कमाएगा, स्त्री बिना सवाल घर संभालेगी। इसी सोच ने

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शिक्षा एवं व्यवसाय

सीबीएसई का डिजिटल प्रयोग बना छात्रों की सबसे बड़ी परीक्षा

जब सुधार के नाम पर व्यवस्था ही संकट बन जाए, तब शिक्षा तंत्र पर सवाल उठना स्वाभाविक है। सीबीएसई ने

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सामाजिक

डिजिटल दुनिया का काला सच : शिक्षित व्हाइट कॉलर आतंक

जब नवाचार की रोशनी विनाश की छाया में बदलने लगे, तब खतरा केवल एक धमाके का नहीं, बल्कि पूरी सुरक्षा व्यवस्था की

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सामाजिक

जंगलों की मौत का नया पता—सोशल मीडिया का काला बाजार

जंगलों का सन्नाटा अब पेड़ों में नहीं, मोबाइल स्क्रीन पर कैद दिखता है। दुर्लभ पक्षियों, अजगर, पेंगोलिन और बाघों के

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राजनीति

कॉकरोच जनता पार्टी : अपमान से जन्मा डिजिटल जनविद्रोह

सपनों की उम्र जब नीट के पेपर लीक, अधूरी भर्तियों और बेरोजगारी में उलझे, तब गुस्सा भीतर ही भीतर जमा

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सामाजिक

हनीट्रैप : जब कामयाब इंसान खुद अपनी कमजोरी का शिकार बन जाता है

कॉर्पोरेट हनीट्रैप आज के डिजिटल युग का अदृश्य जाल है, जो झूठी मुस्कान, आकर्षक संवाद और तकनीकी परतों के पीछे

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