स्मार्ट नहीं, समावेशी शहर : सूरत का स्लम-फ्री सफर राष्ट्रीय प्रेरणा बने
जब किसी शहर की चमक झुग्गियों के अँधेरे को ढकने लगे, तब समझ लेना चाहिए कि विकास की तस्वीर अभी
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Read Moreभारतीय शहर आज विकास की सबसे बड़ी विडंबना का प्रतीक बन चुके हैं। वर्ष का एक हिस्सा पानी की एक-एक
Read Moreभारतीय राजनीति की सबसे ऊंची कुर्सियों के लिए अब केवल जनादेश पर्याप्त नहीं रहेगा, बल्कि कानून की कसौटी पर खरा
Read Moreमोबाइल नंबर अब तक डिजिटल पहचान का सबसे भरोसेमंद आधार रहा है, लेकिन अब उसकी जगह यूजरनेम लेने की तैयारी
Read Moreस्वच्छता किसी राष्ट्र का श्रृंगार नहीं, उसका चरित्र है। किसी देश की असली पहचान संसद, मेट्रो या एक्सप्रेस-वे नहीं, बल्कि
Read Moreजब कोई राष्ट्र नई तकनीक नहीं, बल्कि नई दिशा गढ़ता है, तभी इतिहास करवट लेता है। 26 जून 2026 को
Read Moreविश्व क्रिकेट में प्रतिष्ठा, ट्रॉफियां और रैंकिंग केवल रिकॉर्ड सजाती हैं; मैदान पर जीत उसी की होती है जो परिस्थितियों
Read Moreविकास की सच्ची पहचान चौड़ी सड़कों या बड़े उद्योगों से नहीं, बल्कि अवसरों की समान पहुंच से होती है। जब
Read Moreजंगलों से उठती आह अब गांवों की दहलीज तक सुनाई देने लगी है। आधी रात खेतों में उतरते हाथी, बस्तियों
Read Moreजब कागजों की मंजूरियाँ और बंद लिफाफे सच को ढकने लगते हैं, तब आग केवल इमारतों तक सीमित नहीं रहती,
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