Author: प्रो. आरके जैन 'अरिजीत'

सामाजिक

सिस्टम की आग में जलते मजदूर, प्रगति का स्वांग कब तक?

जब रोज़ी-रोटी कमाने निकले हाथ आग की लपटों में खो जाएं, तब हादसे सिर्फ दुर्घटनाएं नहीं, व्यवस्था की नाकामी का आईना बन

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सामाजिक

मरीज, मशीन और हैकर: स्वास्थ्य व्यवस्था का नया संकट

अस्पतालों की सुरक्षा की पारंपरिक तस्वीर बदल रही है। आज स्वास्थ्य सेवाएँ इंटरनेट, डेटा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर आधारित हैं। मरीज

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राजनीति

क्या पुतिन ने एक वाक्य में बदलती दुनिया का सच कह दिया?

इतिहास के कठिन दौर ही रिश्तों की असली परीक्षा लेते हैं। ऐसे समय में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का

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विज्ञान

ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस : मानव स्वतंत्रता की आखिरी परीक्षा का नाम

2030 तक मानव सभ्यता एक भयावह और आश्चर्यजनक मोड़ पर पहुंचने वाली है। वह दौर जब मस्तिष्क की अंतिम सीमाएँ

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सामाजिक

गरीब मरीज पूछ रहा है— क्या मेरा जीवन इतना सस्ता है?

स्वास्थ्य व्यवस्था की असली परीक्षा अस्पतालों की इमारतों से नहीं, मरीज को समय पर मिलने वाले उपचार से होती है।

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सामाजिक

परदेस से आई उम्मीदें, दिल्ली की आग में राख हो गईं

कुछ त्रासदियाँ सिर्फ जानें नहीं लेतीं, वे इंसानियत की चेतना को भी झकझोर देती हैं। दिल्ली के मालवीय नगर स्थित

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विज्ञान

साइबर सुरक्षा का नया सच: जितना भरोसा, उतना बड़ा जोखिम

आज हमारी बैंकिंग, निवेश, सरकारी सेवाएं, सामाजिक संपर्क और व्यावसायिक गतिविधियां पासवर्डों की सुरक्षा पर निर्भर हैं। इसी कारण पासवर्ड

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शिक्षा एवं व्यवसाय

पेपर लीक की आड़ में डिजिटल शिक्षा पर अंजना का ‘दो कौड़ी’ तंज

भारतीय शिक्षा जगत में यह शायद ही पहले कभी देखने को मिला हो कि एक टीवी स्टूडियो में कही गई

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सामाजिक

महंगाई की चक्की में पिसता वो अनाज, जिसकी रोटी सब खा रहे हैं

भारत की आर्थिक कहानी में एक ऐसा पात्र है जो हर अध्याय में मौजूद रहता है, लेकिन जिसकी पीड़ा अक्सर

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पर्यावरण

गर्मी में प्यास, बारिश में सैलाब : विकास के मॉडल पर बड़ा सवाल

21वीं सदी का भारत एक कड़वी विडंबना के दौर से गुजर रहा है। एक ओर देश अंतरिक्ष में नई ऊंचाइयां

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