कविता – सतगुरु से बड़ा कोई मीत नहीं
सतगुरु से बड़ा कोई मीत नहीं,अरदास से बेहतर कोई गीत नहीं।एक बार सच्चे मन से याद तो कर,सूना जीवन भी
Read Moreसतगुरु से बड़ा कोई मीत नहीं,अरदास से बेहतर कोई गीत नहीं।एक बार सच्चे मन से याद तो कर,सूना जीवन भी
Read Moreहे मेरे ईश्वर-सतगुरु,मेरी बस यही विनती है,प्रेम से भरी हुई आँखें देना,हर जीव के लिए ममता रहेश्रद्धा से झुका हुआ
Read Moreहर पल का शुकराना,हर साँस का शुकरानातेरी दी हर धड़कन,हर आस का शुकराना।सूनी राहों में भी तूने उजियारा भर डालाहे
Read Moreज़िंदगी जीने के लिए बनी थी,हमने सोचने में गुज़ार दीकल की चिंता,बीते कल की यादों में हर खुशियाँ हार दी।जो
Read Moreश्रेष्ठता का आधार ऊँचे आसन से नहीं बनता हैवह तो निर्मल विचारों से जीवन में खिलता है।पद और प्रतिष्ठा समय
Read Moreआओ शख्स बनकर नहीं,शख्सियत बनकर जीना सीखें,अपने कर्मों से हर दिल में उजियारा बोना सीखें।नाम नहीं,नेकियों की खुशबू पहचान बनेऐसा
Read Moreमौन की भाषा में जीवन का सारा ज्ञान समाया हैहर रिश्ते का अपना मर्यादित सम्मान निभाया हैजिसको जितना देना हो,पहले
Read Moreचाहने से हर ख़्वाब,तक़दीर का हिस्सा नहीं होता,हर मुस्कान के पीछे,ख़ुशियों का किस्सा नहीं होता।दिल तो चाहता है,हर मंज़िल कदमों
Read Moreअब दौर बदल गया,सच अक्सर कटघरे में खड़ा मिलता हैझूठ ऊँची आवाज़ में बोलकर भी सम्मान बड़ा पाता है।चेहरों की
Read Moreचेहरे की चमक पलभर में,समय कभी भी हर लेता है,चरित्र का उजियारा लेकिन,युग-युग तक साथ रहता है।रूप नहीं, व्यवहार बताता,इंसान
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