कविता – सतगुरु भाणे में शिष्य का हित छिपा होता है
सतगुरु भाणे में शिष्य का हित छिपा होता है,हर हुक्म में प्रेम का अमृत घुला होता है।जो सिर झुकाकर गुरु
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