कविता

वक्त सब कुछ दिखा देता है

वक्त ख़ुद तो कभी दिखाई नहीं देता,
मगर हाँ,वक्त सब कुछ दिखा देता।
कौन अपना है,कौन पराया,ये समझा देता,
चेहरों के पीछे छिपा सच सामने ला देता।

जो आज घमंड में आसमान छूते हैं,
वही कल ज़मीन पर आते हुए दिखते हैं।
वक्त ताज भी देता,तख़्त भी छीन लेता है,
इंसान को उसके कर्मों का आईना दिखा देता है।

मुश्किलों में जो अपने होने का दावा करते हैं,
वक्त की आँधी में अक्सर वही बिखरते हैं।
जो बिना स्वार्थ के साथ निभाते हैं रिश्ते,
वक्त उन्हीं रिश्तों की असली कीमत बता देता है।

आज जो दर्द है,कल वही सबक बन जाता है,
आज जो आँसू है,कल वही हौसला बन जाता है।
बस वक्त के फैसले पर भरोसा रखना सीखो,
क्योंकि वक्त हर ज़ख्म का मतलब समझा देता है।

न दौलत हमेशा रहती है,न जवानी ठहरती है,
न सत्ता की कुर्सी उम्रभर किसी की रहती है।
किशन वक्त ख़ुद तो कभी दिखाई नहीं देता,
मगर हाँ,वक्त सब कुछ दिखा देता है।

— किशन सनमुखदास भावनानी

*किशन भावनानी

कर विशेषज्ञ एड., गोंदिया

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