सामाजिक

फ़ोटो एलबम, वक़्त की दराज़ में सिमटी यादों का कारवाँ

एलबम का पन्ना जब भी पलटता है, तो सिर्फ़ एक तस्वीर सामने नहीं आती, बल्कि बीता हुआ पूरा ज़माना मुस्कुराकर सामने खड़ा हो जाता है। तस्वीरों का एलबम महज़ कागज़ के टुकड़ों का पुलिंदा नहीं, बल्कि एहसासों की एक ऐसी किताब है जिसका हर पन्ना बीते हुए लम्हों की ख़ुशबू से महकता है। यह वह आईना है जिसमें हम अपना आज नहीं, बल्कि अपना वह कल देखते हैं जो अब हमारी रूह का हिस्सा बन चुका है।
जब उँगलियाँ एलबम की धूल झाड़कर उसके पन्नों को सहलाती हैं, तो वक़्त की रफ़्तार अचानक थम जाती है। किसी तस्वीर में बचपन की वह बेपरवाह हँसी नज़र आती है, जहाँ खुशियों के लिए किसी वजह की ज़रूरत नहीं होती थी,बस मिट्टी की सोंधी महक और आँगन में दौड़ते नंगे पाँव ही पूरी दुनिया हुआ करते थे। थोड़ा और आगे बढ़ें, तो वालिद के साये में महफ़ूज़ खड़े होने का वह बेमिसाल एहसास ज़िंदा हो उठता है,उनके चेहरे की झुर्रियों में छुपा गहरा तजुर्बा और आँखों का वह बेज़ुबान प्यार आज भी उतना ही सच्चा लगता है। माँ के आंचल की छाँव और भाई-बहनों के साथ हुई वे बेमतलब की तकरारें तस्वीरों के कोनों में सिमटी आज भी मुस्कुराती हैं।
तस्वीरें बोलती हैं,बस उन्हें सुनने के लिए दिल की ख़ामोशी चाहिए,
ठहरा हुआ लम्हा,जो वक़्त हाथ से रेत की तरह फ़िसल गया, उसे तस्वीरों ने हमेशा के लिए अपनी आग़ोश में थाम लिया।
अनकही दास्तानें, किसी महफ़िल का शोर, दोस्तों के साथ बिताई शामें, मंच पर गूँजती ताली की गड़गड़ाहट और अपनों की गर्व से चमकती आँखें,यह सब इन तस्वीरों में आज भी सांस लेती हैं।
यादों का सरमाया,जैसे-जैसे दुनिया बदलती है और चेहरे ढलते हैं, ये तस्वीरें हमें याद दिलाती हैं कि हमारी जड़ें कहाँ थीं और हमने ज़िन्दगी के इस सफ़र में कितना प्यार कमाया है।जब हम इन तस्वीरों को देखते हैं, तो दिल के किसी कोने में एक हल्की सी टीस भी उठती है और होठों पर एक मीठी सी मुस्कान भी तैर जाती है। यह एहसास दिलाता है कि भले ही रास्ते बदल गए हों, कुछ चेहरे दूर चले गए हों और ज़िन्दगी की ज़िम्मेदारियों ने हमें बड़ा कर दिया हो, लेकिन इस एलबम के भीतर बसा हुआ इंसान आज भी वही है,मासूम, ज़िंदादिल और यादों से अमीर।फ़ोटो एलबम दरअसल वक़्त का दिया हुआ वह नायाब तोहफ़ा है जो हमसे हर बार यही कहता है कि जो लम्हे सच्चे दिल से जिए जाते हैं, वे कभी गुज़रते नहींवे तस्वीरों में क़ैद होकर हमेशा के लिए अमर हो जाते हैं।

— डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह सहज़

डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह

पिता का नाम: अशफ़ाक़ अहमद शाह जन्मतिथि: 24 जून जन्मस्थान: ग्राम बलड़ी, तहसील हरसूद, जिला खंडवा, मध्य प्रदेश कर्मभूमि: हरदा, मध्य प्रदेश स्थायी पता: मगरधा, जिला हरदा, पिन 461335 संपर्क: मोबाइल: 9993901625 ईमेल: dr.m.a.shaholo2@gmail.com शैक्षिक योग्यता एवं व्यवसाय शिक्षा,B.N.Y.S.बैचलर ऑफ़ नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंस. बी.कॉम, एम.कॉम बी.एड. फार्मासिस्ट आयुर्वेद रत्न, सी.सी.एच. व्यवसाय: फार्मासिस्ट, भाषाई दक्षता एवं रुचियाँ भाषाएँ, हिंदी, उर्दू, अंग्रेज़ी रुचियाँ, गीत, ग़ज़ल एवं सामयिक लेखन अध्ययन एवं ज्ञानार्जन साहित्यिक परिवेश में रहना वालिद (पिता) से प्रेरित होकर ग़ज़ल लेखन पूर्व पद एवं सामाजिक योगदान, पूर्व प्राचार्य, ज्ञानदीप हाई स्कूल, मगरधा पूर्व प्रधान पाठक, उर्दू माध्यमिक शाला, बलड़ी ग्रामीण विकास विस्तार अधिकारी, बलड़ी कम्युनिटी हेल्थ वर्कर, मगरधा साहित्यिक यात्रा लेखन का अनुभव: 30 वर्षों से निरंतर लेखन प्रकाशित रचनाएँ: 2000+ कविताएँ, ग़ज़लें, सामयिक लेख प्रकाशन, निरन्तर, द ग्राम टू डे, दी वूमंस एक्सप्रेस, एजुकेशनल समाचार पत्र (पटना), संस्कार धनी (जबलपुर),जबलपुर दर्पण, सुबह प्रकाश , दैनिक दोपहर,संस्कार न्यूज,नई रोशनी समाचार पत्र,परिवहन विशेष,समाचार पत्र, घटती घटना समाचार पत्र,कोल फील्ड मिरर (पश्चिम बंगाल), अनोख तीर (हरदा), दक्सिन समाचार पत्र, नगसर संवाद, नगर कथा साप्ताहिक (इटारसी) दैनिक भास्कर, नवदुनिया, चौथा संसार, दैनिक जागरण, मंथन (बुरहानपुर), कोरकू देशम (टिमरनी) में स्थायी कॉलम अन्य कई पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर रचनाएँ प्रकाशित प्रकाशित पुस्तकें एवं साझा संग्रह साझा संग्रह (प्रमुख), मधुमालती, कोविड, काव्य ज्योति, जहाँ न पहुँचे रवि, दोहा ज्योति, गुलसितां, 21वीं सदी के 11 कवि, काव्य दर्पण, जहाँ न पहुँचे कवि (रवीना प्रकाशन) उर्विल, स्वर्णाभ, अमल तास, गुलमोहर, मेरी क़लम से, मेरी अनुभूति, मेरी अभिव्यक्ति, बेटियां, कोहिनूर, कविता बोलती है, हिंदी हैं हम, क़लम का कमाल, शब्द मेरे, तिरंगा ऊंचा रहे हमारा (मधुशाला प्रकाशन) अल्फ़ाज़ शब्दों का पिटारा, तहरीरें कुछ सुलझी कुछ न अनसुलझी (जील इन फिक्स पब्लिकेशन) व्यक्तिगत ग़ज़ल संग्रह: तुम भुलाये क्यों नहीं जाते तेरी नाराज़गी और मेरी ग़ज़लें तेरा इंतज़ार आज भी है (नवीनतम) पाँच नए ग़ज़ल संग्रह प्रकाशनाधीन सम्मान एवं पुरस्कार साहित्यिक योगदान के लिए अनेक सम्मान एवं पुरस्कार प्राप्त पाठकों का स्नेह, साहित्यिक मंचों से मान्यता मुश्ताक़ अहमद शाह जी का साहित्यिक और सामाजिक योगदान न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि पूरे हिंदी-उर्दू साहित्य जगत के लिए गर्व का विषय है। आपकी लेखनी ने समाज को संवेदनशीलता, प्रेम और मानवीय मूल्यों से जोड़ा है। आपके द्वारा रचित ग़ज़लें और कविताएँ आज भी पाठकों के मन को छूती हैं और साहित्य को नई दिशा देती हैं।

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