वीरों की कुर्बानियाँ
माटी अब भी पूछती, कहाँ गए वे लाल।
जो रक्त बहा लिख गये, आज़ादी का भाल।।
फाँसी चढ़कर दे गए, हँसकर अपना प्राण।
ऐसे वीरों की वजह, भारत की पहचान।।
गूँज रही है आज भी, वीरों की हुंकार।
जिनके आगे झुक गया, अंग्रेज़ अत्याचार।।
सीने पर गोली लगी, फिर भी रहे न मौन।
मातृभूमि की आन पर, न्योछावर थे कौन।।
लहू शहीदों का कहे, रखना देश सँभाल।
आजादी अनमोल है, मत करना बेहाल।।
जिनके बलिदानों से मिली, आज़ादी की साँस।
उन वीरों को भूलकर, कैसे हो विश्वास।।
तिरंगे की शान में, झुका रहे हर शीश।
भारत माँ के मान पर, जीवन अर्पित बीस।।
वीरों की कुर्बानियाँ, देतीं आज पुकार।
एक सभी हो देशहित, जन-जन बारंबार।।
जलियाँवाला की धरा, आज तलक है मौन।
रक्त-बूँद हर पूछती, दोषी था वह कौन।।
भगत सिंह की सोच को, रखना दिल के पास।
देशप्रेम की ज्योति से, रोशन हो हर साँस।।
मिट्टी की खुशबू कहे, रखना देश महान।
वीरों के बलिदान का, रखना सौरभ ध्यान।।
— डॉ. सत्यवान सौरभ
