Author: *किशन भावनानी

कविता

कविता – दूसरों की गलतियों पर हम, उँगली उठाते रहते हैं

दूसरों की गलतियों पर हम,उँगली उठाते रहते हैं,अपनी कमियों के आगे मगर,अक्सर मौन ही रहते हैं,पराई गलती दिख जाए तो,चेहरा

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पर्यावरण

पर्यावरण के खतरों से बचाने के लिए नागरिकों की सहभागिता

वैश्विक स्तरपर आज हर देश पर्यावरण समस्याओं का सामना कर रहा है जिसका समाधान खोजने उसपर अमल करने के लिए

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कविता

खुलकर हँसना, मुस्कुराना, मन का सुंदर श्रृंगार

पहले के युग में हँसी थी,रिश्तों का मधुर गान,छोटी-छोटी खुशियों में बसता था सारा जहान।आज सुविधाएँ बढ़ीं,पर मन क्यों रहता

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गीत/नवगीत

माता-पिता की शरण में अनंत वैकुण्ठ सुख समाया

माता-पिता की शरण में,अनंत वैकुण्ठ सुख समाया है,उनके चरणों में ही जीवन का सच्चा उजियारा छाया है।मंदिर-मस्जिद, तीर्थ सभी अपनी-अपनी

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